कबरई (महोबा)। शासकीय निर्माण और विकास कार्यों में मध्यप्रदेश, बिहार, राजस्थान जैसे राज्यों से अवैध खनन परिवहन कर लाए जा रहे उपखनिजों का प्रयोग कबरई क्रशर उद्योग के लिए परेशानी का सबब बन गया है। क्रशर उद्योग के लगातार घाटे में जाने से राजस्व को क्षति पहुंच रही है। जिससे हजारों श्रमिकों व लघु उद्यमियों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है।
कस्बे के गोसाईं ग्रेनाइट में क्रशर यूनियन ने आपात बैठक बुलाई। जिसमें इस समस्या के समाधान के लिए प्रदेश के सभी शासकीय निर्माण व विकास कार्यों में प्रदेश के ही उपखनिज का प्रयोग किए जाने की अनिवार्यता किए जाने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। यूूनियन ने प्रमुख सचिव और खनिज सचिव को पत्र भेजकर बताया की सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में ई-टेंडरिंग व ई-ऑक्सन प्रणाली से खनिज क्षेत्रों के नीलामी व आवंटन की व्यवस्था लागू की गई है जबकि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बावजूद पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश, बिहार, राजस्थान आदि में पुरानी खनिज नीति लागू है। ऐसे में इन राज्यों से अवैध खनन परिवहन कर बेहद सस्ती दर पर उपखनिजों की आपूर्ति उत्तर प्रदेश में की जा रही है। जिससे प्रदेश में पारदर्शी खनिज नीति के तहत उद्यमियों द्वारा ऊंची दर पर लिए गए खनन क्षेत्रों में खनन कार्य नहीं हो पा रहा है। बैठक में यूनियन पदाधिकारी बालकिशोर द्विवेदी, देवेंद्र मिश्र, प्रणव त्रिपाठी, रूपेंद्र सिंह, मनोज जैन, भुवन बाजपेई, ओम नारायण गुप्ता, जयकिशोर शिवहरे आदि मौजूद रहे।
50 फीसदी क्रशर प्लांट ठप
महोबा। जिले का स्टोन क्रशर उद्योग उत्पादित ग्रिट की बिक्री न होने से प्रभावित हो रहा है। 50 फीसदी से भी अधिक क्रशर प्लांट बंद पड़े हैं। जो क्रशर संचालित हैं वे भी लगातार घाटे में जा रहे हैं। यूनियन के सदस्यों व उद्यमियों ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रदेश में हो रहे सभी शासकीय निर्माण कार्य व विकास कार्यों में कम से कम 80 प्रतिशत प्रदेश के ही उपखनिज का प्रयोग किए जाने की अनिवार्यता किए जाने की मांग की है।