अपर जिला सत्र न्यायाधीश द्वितीय संजय हरि शुक्ल ने दहेज हत्या के मामले में दो सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका। मृतका के ससुर पर दोष सिद्ध न होने पर उसे बरी कर दिया गया।
थाना मुस्करा के गांव छानी गांव निवासी जियालाल ने 1995 में अपनी दो बेटियों सुखदेवी और मानकुंवर की शादी महोबा जिले के गांव कोहनिया निवासी चंद्रभान के बेटे मोहन रैकवार और जगदीश रैकवार के साथ की थी। शादी के बाद से ही ससुरालीजन दहेज की को लेकर दोनों को प्रताड़ित करने लगे।
28 अप्रैल 2011 को जगदीश शराब पीकर घर आया और अपनी पत्नी मानकुंवर से पैसे की मांग करने लगा। मानकुंवर के पास जो पैसे उसने सब दे दिए। इसके बाद ससुराल से पैसे लाने को कहा। जिस पर उसने इंकार कर दिया। इससे नाराज होकर जगदीश और उसके भाई मोहन ने मानकुंवर की जमकर पिटाई की।
बीच बचाव करने आई बहन सुखदेवी को भी पीटा। बाद में सुखदेवी को एक कमरे में ले जाकर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। इससे उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट दर्ज न होने पर मृतका के पिता ने अदालत का सहारा लिया। अदालत के आदेश पर 12 जुलाई 2011 को मृतका के पति मोहनलाल, देवर जगदीश और ससुर चंद्रभान के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया।
न्यायाधीश ने गुरुवार को दोनों पक्षों के गवाह और बहस सुनने के बाद दोनों सगे भाइयों को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 10-10 हजार रुपये का जुर्माना ठाेंका। जुर्माना अदा न करने पर एक एक साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।
मृतका के ससुर चंद्रभान पर दोष सिद्ध न होने पर उसे बरी कर दिया। इस मुकदमे की पैरवी सरकार पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता बाबूलाल यादव ने की।