जनपद न्यायाधीश अल्ला रक्खे खां ने दहेज हत्या के मामले में मृतका के पति और जेठ को उम्रकैद की सजा सुनाई साथ ही 7 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका। सास और जेठानी पर दोष सिद्घ न होने पर अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। मृतका का पति पहले से ही जेल में बंद है।
थाना कबरई के ग्राम सिंघनपुर बघारी निवासी बाबूराम ने अपनी बेटी नीतू की शादी 11 मई 2009 को शहरा के मोहल्ला रायपुर निवासी रामचरन के बेटे मोहनलाल के साथ की थी। शादी में सामर्थ से अधिक दान दहेज दिया गया था। पहली विदा के बाद ससुराल से लौटी नीतू ने बताया कि सास जेठानी पति और जेठ एक लाख रुपये की मांग कर रहे है साथ ही मुझे प्रताड़ित करते हैं।
जिस पर नीतू के पिता ने ससुराली जनों के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर कर दिया। सीजेएम की कोर्ट में मुकदमा दर्ज होने के बाद लड़की के ससुरालीजनों ने राजीनामा कर लिया और उसे ससुराल ले गए। लड़की को दोबारा प्रताड़ित करने लगे। 10 जनवरी 2015 को ससुरालीजनों ने नीतू की जलाकर हत्या कर दी। मृतका पिता बाबू राम ने पति मोहन लाल, सास रामप्यारी, जेठ देवीदीन और जेठानी अनीता के खिलाफ थाना कबरई में दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया।
बुधवार को दोनों पक्षों के गवाह और बहस सुनने के बाद पति मोहन लाल और जेठ देवीदीन को दहेज हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जिला शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पालीवाल ने सरकार पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए बताया कि सास और जेठानी पर दोष सिद्ध न होने के कारण साक्ष्य के अभाव में उन्हें बरी कर दिया। जुर्माने की राशि अदा न करने पर 3-3 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।