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एसआईटी के खुलासे से अभियुक्तों को मिली राहत

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कानपुर। महोबा के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी मामले की जांच जिला पुलिस अब एसआईटी की जांच रिपोर्ट को सामने रखकर करेगी। इससे संभावना जताई जा रही है कि जिला पुलिस की जांच कहीं खानापूूरी बनकर न रह जाए। इसके कारण भी हैं, क्योंकि एसआईटी के तथ्यों को पुलिस नकार नहीं सकेंगी। अगर ऐसा हुआ तो जिला पुलिस की जांच का भी रुख खुदकुशी की तरफ ही रहेगा।
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इंद्रकांत हत्याकांड में तीन सदस्यीय एसआईटी ने जांच की, जिसमें वाराणसी रेंज के आईजी विजय सिंह मीना मुखिया थे, जबकि डीआईजी शलभ माथुर और एसपी अशोक कुमार त्रिपाठी टीम के सदस्य थे। दो दिन पहले हत्याकांड के संबंध में हुई प्रेसवार्ता में एडीजी जोन प्रयागराज प्रेम प्रकाश ने जो तथ्य और साक्ष्य सामने रखें उससे इंद्रकांत त्रिपाठी के खुदकुशी करने की पुष्टि हो रही है।
वहीं आरोपी आईपीएस मणिलाल पाटीदार पर इंद्रकांत को प्रताड़ित करने और उगाही करने का आरोप सच साबित हो रहा। यही जांच रिपोर्ट सोमवार को एसआईटी शासन को सौंपेगी। दूसरी तरफ महोबा पुलिस भी मामले की तफ्तीश कर रही है। डीएसपी कालू सिंह जिला पुलिस की जांच के अधिकारी हैं। उन्होंने बताया कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट को विवेचना में शामिल किया जाएगा। जब एसआईटी अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप देगी, तब इसके लिए पत्र भेजा जाएगा।
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इंद्रकांत के मामले में कबरई थाने में हत्या का केस दर्ज है। एसआईटी की जांच में खुदकुशी की तरफ केस का रुख हो गया है। अगर इन तथ्यों को जिला पुलिस आधार बनाएगी तो अंजाम एक ही होने वाला है। यानी कि पुलिस भी आत्महत्या की थ्योरी ही स्थापित करेगी।
अगर इसके इतर हत्या के तथ्य आते हैं तो एसआईटी की जांच पर सवाल खड़े होंगे। लिहाजा एसआईटी की राह पर चलकर पुलिस खानापूरी ही कर पाएगी। वहीं जांच अधिकारी डीएसपी रैंक के हैं, जबकि एसआईटी में आईजी, डीआईजी और एसपी स्तर के अधिकारी थे, तो उनकी रिपोर्ट पर डीएसपी सवाल भी नहीं उठा पाएंगे।
आईपीएस की जांच डीएसपी को केस में आईपीएस मणिलाल पाटीदार मुख्य आरोपी हैं। जांच डीएसपी कर रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर डीएसपी इसकी जांच कैसे करेंगे। अभी तक यही हुआ भी है। जांच अधिकारी मणिलाल पाटीदार को तो छोड़ो, आरोपी इंस्पेक्टर को भी पुलिस अभी तक तलाश नहीं सकी है।
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महोबा। क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी मामले में एसआईटी के खुलासे के बाद से आरोपियों ने राहत की सांस ली है। एसआईटी ने एक सप्ताह तक कई बिंदुओं पर पर जांच करने के बाद क्रशर कारोबारी द्वारा आत्महत्या करने की बात कही, जिससे नामजद आरोपियों को काफी राहत मिली है। इसकी एक वजह ये है कि आत्महत्या के लिए प्रेरित करने में मात्र सात साल की सजा का ही प्रावधान है।
गौरतलब हो कि कबरई कस्बे के जवाहर नगर निवासी क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी को आठ सितंबर को गोली लग गई थी। इसके बाद उन्हें कानपुर के रिजेंसी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां छह दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। मामला हाई प्रोफाइल होने से शासन ने जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया। महोबा आई एसआईटी ने आठ दिन तक जांच करने के बाद मामले का खुलासा कर इंद्रकांत को ही खुदकुशी का जिम्मेदार माना।
अब आत्महत्या का मामला प्रकाश में आने के बाद नामजद आरोपियों पर दर्ज हत्या के मुकदमे की धाराएं हटने के आसार बढ़ गए हैं। हत्या में आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। यदि आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की धाराएं लगती हैं तो धारा 306 में सात साल की सजा का प्रावधान है। हालांकि, दोनों धाराओं में जमानत जिला मुख्यालय के बजाय हाईकोर्ट से ही होगी, लेकिन यदि हत्या की धारा 306 में परिवर्तित होती है तो आरोपियों को कम सजा भुगतनी पड़ेगी।
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