फोटो 02 एमएएचपी 19 परिचय-जानकारी देते चरखारी निवासी सैयद करामत हुसैन काजमी। संवाद
चरखारी (महोबा)। कस्बा चरखारी में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत को लेकर खूब चर्चा हो रही है। यहां के तुर्कियाना मोहल्ला के गोलाघाट में खामेनेई के गुरु अयातुल्ला रूहोल्लाह के वंशज रहते हैं। लोगों का उनके घर इन दिनों आना-जाना लगा है और खामेनेई व उनके गुरु के बारे में खूब बातें कर रहे हैं।
अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी की सातवीं पीढ़ी के सदस्य सैयद अली फरहान काजमी व सैयद करामत हुसैन काजमी बताते हैं कि उनके पूर्वज बाराबंकी जिले के किंतुर गांव से चरखारी आ गए थे जबकि कुछ लोग बाराबंकी में ही रहे। इसी परिवार से सैयद अहमद हुसैन मुसवी हिंदी 1830 में ईरान में बस गए।
इन्हीं के परिवार में वर्ष 1902 में रूहोल्लाह खुमैनी का जन्म हुआ। वर्ष 1989 में खुमैनी की मृत्यु के बाद सबसे करीबी शिष्यों में से एक अयातुल्ला खामेनेई ने ईरान की सत्ता संभाली और सुप्रीम लीडर बने।
सैयद अली फरहान काजमी बताते हैं कि उनके परिवार को गर्व है कि उनके वंशज ईरान जैसे देश के सुप्रीम लीडर बने। उन्होंने अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमले में सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों का रिश्ता जिस मिट्टी से है, उस पर अगर कोई हमला करता है तो हमें दुख होता है। ईरान के वर्तमान हालातों और युद्ध को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई है।
फोटो 02 एमएएचपी 19 परिचय-जानकारी देते चरखारी निवासी सैयद करामत हुसैन काजमी। संवाद