बेलाताल (महोबा)। नहरों की साफ-सफाई व मरम्मत को लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारी कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। रबी फसल की तैयारी में जुटे किसानों को पलेवा की चिंता सताने लगी है। नहरों की सफाई न होने से टेल तक पानी पहुंचने की उम्मीद नहीं हैं। जिससे किसानों में नाराजगी है। उनका कहना है कि नहरों की सफाई व मरम्मत न होने दर्जनों गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिला मुश्किल है।
कस्बा बेलाताल के ऐतिहासिक बेलासागर तालाब से दर्जनों गांव के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। बेलासागर तालाब से दो नहरें निकली हैं। जिनसे जैतपुर, सतारी, बोरा, सुंगिरा, कुलपहाड़, थुरट, सारंगपुरा, दादरी, घटेरा, चुरारी समेत दो दर्जन गांवों को सिंचाई का पानी मिलता है। तालाब से निकली नहरों की सफाई न होने व जगह-जगह कटाव होने से टेल तक पानी पहुंचना मुश्किल नजर आ रहा है। कई बार मांग के बाद सिंचाई विभाग इस ओर कोई रुचि नहीं दिखा रहा है।
किसान देवकीनंदन, अशोक कुमार, रामसेवक अनुरागी, सतारी के राकेश गोस्वामी, मलखान सिंह, प्रहलाद तिवारी, लालबहादुर साहू आदि का कहना है कि किसानों ने खेतों की जुताई करके बुआई योग्य बना दिया है। केवल पलेवा की जरूरत है। अभी तक जगह-जगह बारिश से काफी कटाव हो गया है और झाड़ झंकार फेला है। जिससे टेल तक पानी पहुंचना मुश्किल है। उधर, सिंचाई विभाग के अवर अभियंता शिवलाल का कहना है कि अभी रोस्टर तैयार नहीं हुए हैं। 15 से 20 नवंबर तक नहरें खोल दी जाएंगी। किसानों द्वारा पलेवा के लिए अभी नहरें खोलने की मांग भी नहीं की गई है। नहरों की सफाई का काम शुरू कराया जा रहा है। किसानों को समयावधि में सिंचाई का पानी मिलेगा।