महोबा। जिले में ऑनलाइन गेमिंग की लत बच्चों में तेजी से बढ़ रही है। हालात यह हैं कि कई बच्चे रात में रजाई के अंदर मुंह छिपाकर मोबाइल पर गेम खेलते हैं। रोकने-टोकने पर वे झल्ला जाते हैं, चिल्लाने लगते हैं और स्वभाव में बदलाव भी दिखने लगा है।
जिला अस्पताल में संचालित मानसिक रोग विभाग के मन कक्ष में प्रतिदिन पांच से 10 बच्चों की काउंसलिंग हो रही है। मानसिक विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक मोबाइल व लैपटॉप इस्तेमाल के कारण यह समस्या गंभीर रूप ले रही है। मनो चिकित्सीय परामर्शदाता प्रेमदास के मुताबिक, गेम की लत लगने के बाद बच्चों को पढ़ाई, खेलकूद, नींद या परिवार के साथ समय बिताना अच्छा नहीं लगता। कई मामलों में पैसों की बर्बादी, झगड़े और पारिवारिक तनाव तक की नौबत आ जाती है। बताया कि माता-पिता को चाहिए कि बच्चों से खुलकर बात करें कि वे कौन-सा गेम खेल रहे हैं। खेलने के लिए रोजाना समयसीमा तय करें। मोबाइल व कंप्यूटर में पैरेंटल कंट्रोल का उपयोग करें।
नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. अंकिता गुप्ता ने बताया कि बच्चों को हिंसक व जुए जैसे गेम्स से दूर रखें। ऑनलाइन गेमिंग की लत से बच्चों के मानसिक स्तर पर दुष्प्रभाव पड़ता है। कोई रात में रजाई में मोबाइल ऑन कर लेता है और रोकने पर झल्ला जाता है। ऐसे मामलों में काउंसलिंग की जा रही है और जरूरत पर दवाएं भी दी जाती हैं। ताकि चिड़चिड़ापन कम हो।