गोरखगिरि की परिक्रमा लगाते पर्यावरण प्रेमी
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महोबा। बुंदेलखंड के बेशकीमती बकस्वाहा जंगल को बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों ने आवाज बुलंद की है। एक सप्ताह पहले प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को खून से खत लिख चुके बुंदेलों ने गुरुवार को ज्येष्ठ अमावस्या पर गोरखगिरि धाम की परिक्रमा लगाई। जंगल के हरे पेड़ों को कटने से बचाने की भगवान से प्रार्थना की।
बकस्वाहा जंगल मध्यप्रदेश के पड़ोसी जिले छतरपुर में है। जहां हीरा भंडार मिलने के चलते सरकार ने काटने का आदेश दिया है। इससे चिंतित पर्यावरण प्रेमी जंगल काटने का हर तरह से विरोध कर रहे हैं।
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि गोरखगिरि धाम की परिक्रमा वैसे तो हर पूर्णिमा और अमावस्या को होती है, लेकिन आज परिक्रमा बकस्वाहा जंगल बचाने के लिए की गई। इसमें मार्ग पर पड़ने वाले सभी ऐतिहासिक मंदिरों पर पहुंच कर बकस्वाहा जंगल को बचाने के लिए प्रार्थना की गई।
परिक्रमा सुबह साढ़े पांच बजे शिवतांडव मंदिर से शुरू हुई। जो महावीरन, बाल हनुमान, बजरंगबली, सकरे सन्या, काली मंदिर, शनिदेव मंदिर, राधा कृष्ण, नाग देवता, छोटी चंडिका मंदिर और काल भैरव होते हुए वापस शिव तांडव मंदिर पहुंची। परिक्रमा में डॉ. एलसी अनुरागी, प्रवीण चौरसिया, अवधेश गुप्ता, दिनेश खरे, प्रहलाद पुरवार, ग्यासी लाल, राम किशन सेन, उमेश यादव और भानु कुशवाहा समेत तमाम पर्यावरण प्रेमी शामिल रहे।