महोबा। वीर ऊदल का जन्मोत्सव बुंदेलों ने धूमधाम से मनाया। उन्होंने ऊदल चौक पहुंचकर स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही उनकी वीरता के किस्से सुनाए।
बुंदेली समाज ने प्रशासन से महोबा में उनके नाम से ऐसा संग्रहालय बनाने की मांग कि जिसमें आल्हा ऊदल के जन्म से लेकर 12वीं शताब्दी की उन सभी 52 लड़ाइयों का सचित्र विवरण एक साथ उपलब्ध हो।
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि महोबा के वीर ऊदल का नाम इतिहास में दर्ज है। लंबे समय से संग्रहालय बनाने की मांग चली आ रही है, जो आज तक पूरी नहीं हो सकी।
महामंत्री डाॅ. अजय बरसैंया ने कहा कि ऊदल का जन्म मुख्यालय से 10 किमी दूर दिसरापुर गांव में राजा परमाल के सेनापति दक्षराज व माता देवला के यहां हुआ था।
दिलीप जैन ने कहा कि ऊदल की शादी नरवरगढ़ की राजकुमारी फुलवा से हुई। सन् 1182 में कीरत सागर के तट पर पृथ्वीराज चौहान की सेना पर विजय ने आल्हा-ऊदल की वीरता के किस्से जन-जन तक पहुंचा दिए।
महाकवि जगनिक ने आल्हाखंड रचकर उनको अमर बना दिया। इस मौके पर डॉ. देवेंद्र पुरवार, अवधेश गुप्ता, प्रवीण चौरसिया, मनीष जैदका, गयाप्रसाद, संजय अग्रवाल आदि मौजूद रहे।