महोबा। देश-विदेश में प्रसिद्ध महोबा के देशावरी पान की खेती पाले की चपेट में आ रही है। बरेजों में पान के काले पड़ने और मुरझाने से किसानों को हजारों का नुकसान हो रहा है।
दो दशक पहले तक जिले में 500 एकड़ में पान की खेती होती थी। महोबा के पान को नई पहचान दिलाने के लिए दो साल पहले जीआई टैग की सूची में शामिल किया गया था। इससे पान किसानों को उम्मीद जगी थी, लेकिन पाले के कारण पान की खेती प्रभावित हो रही है। ठंड के चलते फसल बर्बाद हो रही है।
एनबीआरआई लखनऊ के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक रामसेवक चौरसिया का कहना है कि पान के पत्ते काले पड़ने के साथ बेल भी खराब हो रही है। पिछले वर्ष भी पान की खेती बर्बाद हुई थी।
उनका कहना है कि किसान अपने बरेजों पर पॉलिथीन डालकर रखें। खली का घोल बनाकर पान की बेल में डालें। साथ ही बरेजे के अंदर धुआं करें ताकि पान की बेल पर पाले का प्रकोप कम हो सके।