बैंक कर्मियों के खराब रवैसे से कस्बे सहित क्षेत्र के 22 गांवों के खाताधारक परेशान है। जिससे बैंक से पैसा निकालना या जमा करना जंग के समान लगता है। कस्बे में मात्र एक बैंक होने से 25 हजार कस्बे के खाताधारक और क्षेत्र के 22 गांवों के खाताधारक आने से बैंक में तू-तू मै-मै होना आम बात हो गई है। जिससे क्षेत्र के खाताधारकों को बिना सूचना के ही गांव लौट जाना पड़ता है।
नगर पंचायत खरेला के मुख्य बाजार के बीच स्थित इलाहाबाद बैंक शाखा में पर्याप्त जगह और उपभोक्ताओं के लिए सुविधाएं न होने से उमड़ती भीड़ के बीच रोजाना संघर्ष की नौबत होती है। इलाहाबाद बैंक के भरोसे 25 हजार आबादी के नगर और जुड़े 22 गांव के सैकड़ों उपभोक्ताओं है। जहां वृद्धा, विधवा, विकलांग और गरीबों को समाजवादी पेंशन के साथ-साथ बैंक से संचालित रोजगार परक कल्याणकारी योजनाओं और किसान क्रेडिट कार्ड योजना के लाभार्थियों की भीड़ रोजाना उमड़ती है। जहां पैसा निकालने और जमा करने के लिए ही लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ती है। उपभोक्ताओं की भीड़ और बैंक कर्मियों द्वारा अच्छा बर्ताव न किए जाने से दर्जनों खाताधारक मायूस होकर लौट जाते है। बैंक में तैनात कर्मचारी खाताधारकों को समुचित सेवा देने के स्थान पर उन्हें डांट डपट कर भगा देते है। वहीं बैंक कर्मचारी खाताधारकों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते है। सोमवार को बैंक के कार्य से पहुंचे चद्रशेखर तिवारी, व्यापारी रामजी और मदन ने बताया कि बैंक में सुविधाए उपभोक्ताओं के लिए कुछ भी नही है। उपभोक्ताओं की संख्या अधिक होने की वजह से भीड़ के बीच लेनदेन में सघर्ष झेलना पड़ता है। बैंक से अपना पैसा निकालना सीमा पर जंग लड़ने से कम नही है। शाखा प्रबंधक पीआर वर्मा का कहना है कि उपलब्ध स्टाफ और संसाधनों के सहारे बैंक उपभोक्ताओं कृषको, व्यापारियों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास कर रहे है।