फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जल संचयन के लिए प्रशासन ने दिखाई तेजी

Wed, 22 Jun 2016 11:13 PM IST
अमर उजाला महोबा
विज्ञापन
चेकडैम के निर्माण में लगे मजदूर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
जिले का सबसे अधिक सूखाग्रस्त क्षेत्र जैतपुर और पनवाड़ी ब्लाक में जल संचयन के लिए बारिश से पहले चार करोड़ की लागत से 12 चेकडैम के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। वहीं जिले के तालाबों की खुदाई का काम युद्धस्तर पर हो रहा है। जिससे बारिश के दौरान तालाब अपनी पूरी भंडारण क्षमता के साथ भर सके।
विज्ञापन


जैतपुर और पनवाड़ी ब्लाक में कुओें एवं हैंडपंपों का जल स्तर काफी नीचे चले जाने के कारण पूरे क्षेत्र में पानी की समस्या गहरा गई है। प्रशासन की पहल पर जल निगम ने चार करोड़ की लागत से दोनों ब्लाकों में छह-छह चेकडैम बनाए जाने का निर्णय लिया है। जैतपुर ब्लाक में ग्राम बगवाहा में 20 लाख, रावतपुरा खुर्द,  खैरारी और भदरवारा में 24-24 लाख, कुड़ई में एक करोड़ की लागत से दो चेकडैम बनाए जा रहे हैं।

इसी प्रकार पनवाड़ी विकासखंड के बम्हौरी कुर्मिन में 23 लाख, महोबकंठ में 25-25 लाख की लागत से दो, निसवारा में 40 लाख, रूरीखुर्द में 43 लाख, भूरा ग्राम में 27 लाख की लागत से चेकडैम का निर्माण कराया जा रहा है। जल निगम निर्माण खंड सिविल के अधिशाषी अभियंता ओम प्रकाश ने बताया कि चेकडैम निर्माण का लक्ष्य अगस्त में पूरा कराने का है। गुणवत्ता पर ध्यान देने के लिए अभियंताओं से निगरानी कराई जाएगी।
विज्ञापन


महोबा। 2013 में जल निगम सिविल शाखा ने चेकडैम निर्माण के लिए स्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा था। वर्ष 2014-15 में शासन ने बजट स्वीकृत कर धनराशि अवमुक्त कर दी थी। मई 2015 से फरवरी 2016 के बीच कई बार चेकडैम निर्माण की निविदाएं आमंत्रित की गई। जिसकी तारीख सत्तापक्ष के नेता बढ़वाते रहे। अप्रैल माह में मुख्य अभियंता जल निगम झांसी के निर्देश पर तीन साल पुराने स्टीमेट दरों से तीस - तीस प्रतिशत कम दरों पर टेंडर स्वीकृत कर दिए गए। ऐसी स्थिति में चेकडैम के निर्माण में गुणवत्ता कैसे आएगी।

महोबा। केंद्र व प्रदेश सरकार ने प्रदेश में जल संचयन को लेकर चलाई जा रही चेकडैम निर्माण योजना में हो रही धांधली को गंभीरता से लेते हुए शासनादेश जारी किया है। जिसमें प्रत्येक चेकडैम के निर्माण लागत की 10 प्रतिशत जमानत धनराशि गुणवत्ता बनाए रखने की दृष्टि से तीन साल तक विभाग में जमा रहेगी। जिससे ठेकेदार और विभाग की मनमानी नहीं चल सकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें