जल हल यात्रा के जरिये बुंदेलखंड के सूखे की जमीनी हकीकत जानने निकली स्वराज अभियान की टीम ने गांव में ग्रामीणों से बातचीत कर उनका हाल जाना। यात्रा के दौरान गांव में चौकाने वाली स्थिति सामने आई। ग्रामीणों ने बताया कि उनके पास खाद्य सुरक्षा और पीले राशन कार्ड होने के बाद भी उन्हें गेहूं चावल नहीं दिया जा रहा है। जिससे एक वक्त का भोजन करके काम चला रहे हैं।
स्वराज अभियान के संयोजक डा. योगेंद्र यादव ने बम्हौरीखुर्द और लाड़पुर में ग्रामीणों से उनका हाल जाना। साथ ही उन्हें सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी किए गए आदेश की जानकारी दी। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें सूखे के संकट में भी गेहूं चावल नहीं मिल रहा है। कोटेदार पीले कार्ड धारकों को तो चार माह से राशन नहीं दे रहा है। एक माह से खाद्य सुरक्षा के कार्ड पर खाद्यान्न नहीं मिला है।
योगेंद्र यादव ने गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों को बताया कि स्वराज अभियान में सरकार के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में रिट दायर की थी कि प्रदेश सरकार सूखे के संकट में राहत नहीं पहुंचा रही है। इस पर सर्वोच्च अदालत ने 13 मई को फैसला सुनाते हुए सरकार को आदेश दिया है कि सूखा प्रभावित जिलों में हर घर को खाद्यान्न मुहैया कराए।
अदालत ने फैसले में यह भी कहा कि खाद्य सुरक्षा के अलावा पीले कार्ड धारकों को भी दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये के हिसाब से चावल दिया जाए। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें आईडी से तो दूर राशन कार्ड पर भी खाद्यान्न नहीं मिल रहा है। जिस पर स्वराज अभियान के संयोजक ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री के सामने उठाए जाने की बात कही है।