महोबा। जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनों में घोटालेबाजों ने केवल व्यक्तिगत दावों में ही क्लेम देकर खेल नहीं किया बल्कि इससे भी एक कदम आगे जाकर फसलों की कटाई के बाद पोस्ट हार्वेस्ट के नाम पर भी मनमाने ढंग से क्लेम चुनिंदा लोगों को दिया है। इसकी जांच के बाद घोटाले की राशि बढ़ने के आसार हैं।
जिले में खरीफ 2024 में घोटालेबाजों ने नदी, वन, पहाड़, बंजर भूमि के साथ किसानों की भूमि का फर्जी बीमा कराकर क्लेम हड़प लिया। जिले में खरीफ सीजन में यह घोटाला करीब 40 करोड़ का सामने आया। रबी सीजन 2024 में भी मनमाने तरीके से फसल बीमा क्लेम दिए जाने की परतें खुल रही हैं। रबी 2024 में जिले में फसल की कटाई होने के बाद इसमें नुकसान दर्शाकर 3.53 करोड़ रुपये का क्लेम दिया गया। चरखारी ब्लॉक के गुढ़ा गांव के 335 किसानों ने 568 हेक्टेयर का बीमा कराया था। इसमें से कुछ किसानों को पोस्ट हार्वेस्ट के नाम पर 35 लाख रुपये का भारी भरकम क्लेम दिया गया। इस गांव में व्यक्तिगत दावे में भी 14 लाख का क्लेम दिए जाने का मामला पहले ही उजागर हो चुका है। इसी क्षेत्र के रागौल गांव के 80 किसानों ने 80 हेक्टेयर जमीन में बीमा कराया। यहां पर पोस्ट हार्वेस्ट के नाम पर सात लाख रुपये का क्लेम दिया गया। क्षेत्र के कुछ अन्य गांवों में भी दो से पांच लाख रुपए के पोस्ट हार्वेस्ट क्लेम चुनिंदा किसानों को भुगतान किए गए। इसी तरह से केवल चरखारी ब्लॉक में 1.04 करोड़ रुपये का क्लेम दिया गया। जैतपुर ब्लॉक के महुआबांध गांव में पोस्ट हार्वेस्ट के नाम पर 10 लाख रुपये और बछेछरकलां गांव में छह लाख रुपये का क्लेम चुनिंदा लोगों को दिया गया। कुछ अन्य गांवों को मिलाकर 50 लाख रुपये का क्लेम पोस्ट हार्वेस्ट में दिया गया। कबरई ब्लॉक में 63 लाख रुपये का भुगतान पोस्ट हार्वेस्ट में किया गया। यहां के मवईखुर्द गांव में 115 किसानों ने 273 हेक्टेयर जमीन पर फसल बीमा कराया था। यहां पर चुनिंदा लोगों को सात लाख रुपये का पोस्ट हार्वेस्ट क्लेम दिया गया। इस गांव में व्यक्तिगत दावे में 15 लाख रुपये का क्लेम इसी सीजन में पहले ही दिया जा चुका था। वहीं, पनवाड़ी ब्लॉक में 1.36 करोड़ रुपये का क्लेम पोस्ट हार्वेस्ट के नाम पर दिया गया। यहां के कनकुआं गांव में 172 किसानों ने 198 हेक्टेयर जमीन पर फसल बीमा कराया। इसमें से चुनिंदा किसानों का फसल बीमा के पोस्ट हार्वेस्ट क्लेम के रूप में 11 लाख रुपये का भुगतान हुआ। इसी तरह तेईया-काशीपुरा गांव में आठ लाख रुपये का भुगतान मनमाने तरीके से किए जाने की आशंका है।
यह है पोस्ट हार्वेस्ट सर्वे
महोबा। यदि फसल की कटाई के बाद फसल खेत में रखी हो। उसकी थ्रेसिंग, मड़ाई न हो पाए और इसी बीच प्राकृतिक आपदा जैसे आंधी, तूफान, ओलावृष्टि, अतिवृष्टि के कारण फसल में नुकसान हो जाता है तो संबंधित बीमा कंपनी को सूचना देनी पड़ती है। इसके बाद बीमा कंपनी के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचकर नुकसान का आंकलन करते हैं। इसके बाद पोस्ट हार्वेस्ट क्लेम दिया जाता है। किसान नेता गुलाब सिंह राजपूत कहते हैं कि पोस्ट हार्वेस्ट के नाम पर जिले में खूब गड़बड़ी हुई है। इसमें बीमा कंपनी की मिलीभगत से दलालों ने अपने खास लोगों को लाभ दिया है। इसमें सांठगांठ करके फसल का नुकसान दिखाए जाने और मनमाने तरीके से क्लेम का भुगतान किए जाने की आशंका है। इसलिए मामले की विस्तृत जांच होनी चाहिए।
प्रीमियम जमा करने वालों का पता चलेगा, तब पकड़ में आएंगे असली जालसाज
महोबा। किसान नेता गुलाब सिंह राजपूत का आरोप है कि खरीफ और रबी दोनों ही सीजन में जो भी घोटाले हुए हैं, उनके वास्तविक जालसाजों तक पहुंचना बहुत आवश्यक है। इसमें बीमा कंपनी से यह जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए कि संदिग्ध बीमा पॉलिसियों का प्रीमियम किसने पेमेंट किया है। आशंका है कि कृषि विभाग के कर्मचारियों ने दलालों के माध्यम से स्वयं की प्रीमियम भरकर पॉलिसी करा दीं और किसानों को पता ही नहीं चला। घोटाले की शुरूआत ही किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से पॉलिसी लेते समय प्रीमियम भुगतान के साथ हुई है। इसलिए यदि भुगतान से संबंधित जानकारी मिल जाएगी तो असली जालसाजों के बारे में पता चल जाएगा।