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एक शाम ‘आल्हा गायन’ के नाम

Sat, 20 Aug 2016 10:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
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आल्हा गायन सुनाते आल्हा गायक। - फोटो : अमर उजाला
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ऐतिहासिक कजली मेले की पहली शाम आल्हा गायकों के नाम रही। दूर दराज से आए कलाकारों ने आल्हा-ऊदल की वीरता का शानदार वर्णन किया। आल्हा गायन सुनकर बुंदेलों की भुजाएं फड़क उठी। आल्हा गायन सुनने के लिए कीरत सागर तट मेला प्रेमियों की भारी भीड़ जुटी रही। महोबा संरक्षण एवं विकास समिति के तत्वावधान में देर शाम को शुरू हुए
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कार्यक्रम में आल्हा सम्राट वंशगोपाल यादव ने  ‘बड़े लड़इया महुबे वाले जिनसे हार गई तलवार’आल्हा गायन सुनाकर श्रोताओं में जोश भरा। मंच पर उन्नाव से आए आल्हा गायक पंकज तिवारी ने अपने पिता रामलखन तिवारी के साथ क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जीवनी पर आधारित आल्हा गायन सुनाकर श्रोताओं में देश भक्ति का जोश भर दिया। उन्होंने ‘लिखी

विधाता के  मिती है न जो विदना लिखी बताए, चंद्रशेखर पहुंचे इलाहाबाद में तुरतई गोली दई चलाए’ सुनाया। इसके बाद प्रेमनारायण हरदोनी बांदा, छक्कू यादव जबलपुर ने भी आल्हा गायन की प्रस्तुति दी।
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आल्हा गायकों ने भरा वीर रस का जोश
आल्हा सम्राट एवं नाना शिवराम सिंह की 76वीं स्मृति पर आल्हा गायकों ने आल्हा खंड के विभिन्न कथानकों का वर्णन किया। इसमें आल्हा ऊदल की वीरता और राजा परमाल व लाखन सिंह से जुड़े प्रसंग खूब रहे। तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन आल्हा गायक चरन सिंह तमौरा, छोटे सिंह पुपवारा, रामनारायण वृदावन, परसुराम सिंह मवई, किशन कुशवाहा,


अच्छेलाल गुढ़ा, मनीराम यादव पड़ोरा सहित दो दर्जन कलाकारों ने वीर, करुण और शृंगार रस की महफिल सजाई। आल्हा गायन सुनने के लिए श्रोताओं की भारी भीड़ जुटी। कार्यक्रम संयोजक उत्तम सिंह, श्याम सिंह, कंहैया सिंह, सिने अभिनेता पदमप्रताप सिंह, रणजीत सिंह सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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