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वीर आल्हा को इतिहास में नहीं मिला उचित स्थान- संयोजक

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महोबा। वीर आल्हा को इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला है। यह बात बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने जयंती पर कही। लोगों से मास्क पहनने की अपील की।
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बुंदेली समाज के संयोजक ने कहा कि पृथ्वीराज चौहान को गुरू गोरखनाथ के कहने पर प्राणदान देने वाले वीर आल्हा को इतिहास में जो स्थान मिलना चाहिए था, वो नहीं मिला। इतिहासकारों ने पृथ्वीराज चौहान को ज्यादा महत्व दिया। आल्हा की निशानियां भी मिट चुकीं हैं। महामंत्री डॉ. अजय बरसैया ने बताया कि महोबा में भी अगर आल्हा चौक और ऊदल चौक न होते तो हम इसे आल्हा-ऊदल की नगरी साबित न कर पाते। वर्ष 1984 में तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट संजीव अहलूवालिया ने आल्हा प्रतिमा का निर्माण कराया था। आल्हा जयंती पर ग्यासी लाल कोस्टा, वीरेंद्र अवस्थी, प्रेम चौरसिया, मोहित समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
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