मालूम हो कि आंगनबाड़ी केंद्राें पर हर माह ग्र्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस कार्यक्रम के आयोजन कि निर्देश है। केंद्राें पर एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियाें द्वारा बच्चों को पुष्टाहार वितरण, टीकाकरण, पेट के परीक्षण के अलावा गर्भवती महिलाआें का ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, वजन, उचित भोजन और प्रसव के लिए सलाह देने की व्यवस्था है। लेकिन केंद्राें पर नियमित एएनएम के न पहुंचने से सरकार क मंशा पर पानी फिर रहा है। कार्यक्रम में पांच वर्ष तक आयु के सभी बच्चों का वजन किए जाने,बच्चा कुपोषित है या नहीं इसकी जांच किए जाने, बच्चों को नियमित पोषाहार वितरण पर नजर रखी जाती है। इसके साथ ही आशा बहू द्वारा सूची बनाने बच्चों को प्रेरित करने आदि पर नजर रखी जाती है। योजना के तहत गर्भवती महिलाआें का सब सेंटर पर प्रसव कराने और कुपोषित बच्चाें की जांच पड़ताल करने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण व एएनएम के रहने के लिए आवास बनाए गए हैं। इसके साथी ही सभी गावों में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को पोषाहार देकर उन्हें कुपोषण से बचाने का जतन किया करने के बाद भी कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं हो रही है।
समिति भी नहीं साबित हो रही कारगर
बच्चाें को कुपोषण से बचाने के लिए गांव-गांव में ग्राम स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता समिति का गठन किया गया है। जिसमें प्रधान को समिति का अध्यक्ष, एएनएम को सचिव और गांव के तीन ग्रामीणों को सदस्य बनाया गया है। इस समिति का कार्य स्वास्थ्य कार्ययोजना बनाने, कौन गरीब कुपोषित है, इसकी रिपोर्ट तैयार कर रिपोर्ट भेजने का काम किया जाता है। साथ ही लोगों को आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करने के लिए भी प्रेरित किया जाता है।
बच्चाें को कुपोषण से बचाने के लिए नियमित आंगनबाड़ी केंद्राें में पुष्टाहार का वितरण किया जाता है। जिससे गरीब बच्चाें को नियमित आहार मिल सके। साथ ही एएनएम के सहयोग से आंगनबाड़ी केंद्रों में टीकाकरण का भी प्रावधान है।
रामेश्वर पाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी।