प्रसिद्ध श्रीगुमान बिहारी मंदिर में 23 वर्ष बाद भगवान राधा कृष्ण फिर पालने में झूलने लगे हैं। पवित्र सावन मास में भगवान को झूला झुलाने की परंपरा शुरू हो गई है। इस मौके पर बढ़ी संख्या में भक्तों ने मंदिर पहुंचकर भगवान के नए स्वरूपों के दर्शन किए।
बुंदेलखंड के कश्मीर कहे जाने वाले चरखारी में सैकड़ों वर्ष प्राचीन श्रीगुमान बिहारी मंदिर में विराजमान भगवान राधा कृष्ण को वर्षों बाद झूला झुलाने की परंपरा शुरू की गई है। श्रीगुमान बिहारी मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से संचालित व्यवस्था में कमी होने की वजह से 1992 में पदेन अध्यक्ष तत्कालीन डीएम ने चांदी से बने करीब दो क्विंटल वजन के सिंहासन और झूले को मालखाने चरखारी में जमा करा दिया था। 23 वर्षों तक प्राचीन परंपरा के अनुसार सावन मास में भगवान राधा कृष्ण को झूले में झुलाने की व्यवस्था बंद रही। तत्कालीन डीएम अनुज झा द्वारा प्राचीन व्यवस्था को बरकरार रखते हुए धार्मिक आस्था के प्रतिरूप श्रीगुमान बिहारी मंदिर में भगवान के सिंहासन झूले को मंदिर में स्थापित करने का की कार्रवाई शुरू की गई थी। ट्रस्ट के पदेन सचिव चरखारी तहसीलदार अहिवरन सिंह ने ट्रस्ट सदस्यों के साथ बैठक कर पिछले सप्ताह मंदिर की व्यवस्था को दुरुस्त करते हुए प्राचीन भव्य मंदिर की परंपरा को पुन: जीवंत करने का मसौदा तैयार कराया था। शनिवार को श्रीगुमान बिहारी मंदिर में भगवान राधा कृष्ण की मन मोहक प्रतिमा को सिंहासन झूले में बैठाकर झुलाने की परंपरा शुरू कराई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों ने पहुंचकर वर्षों बाद भगवान के प्राचीन स्वरुप के दर्शन किए। देर शाम तक महिलाओं, बच्चों के आने का सिलसिला चलता रहा। इस मौके पर तहसीलदार अहिवरन सिंह, ट्रस्ट के सदस्य प्रेमनारायण थापक, अधिवक्ता नाथूराम यादव, अधिवक्ता विनोद खरे, मनोहर लाल गुरुदेव, कार्यालय प्रमुख देवनंदन तिवारी, पदम सिंह, पुजारी रवेंद्र गुरुदेव सहित समाज सेवी, नगर के व्यापारी मंदिर में मौजूद रहे।