भरुआ सुमेरपुर (हमीरपुर)। लू लगने से खलासी की मौत के मामले में पत्नी व बच्चों के अनशन पर बैठने के बाद पुलिस ने 18 दिन बाद कब्र से शव निकालकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
पीड़ित पत्नी का आरोप है कि पति की मौत के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम नहीं कराया। आर्थिक तंगी के चलते लोगों ने शव को दफना दिया था। पत्नी ने पति की हत्या होने का आरोप लगाया है।
इंगोहटा निवासी राजकुमारी ने बताया कि उनके पति रामबहादुर प्रजापति (45) बीते 11 जून को मौदहा के एक ट्रक में खलासी का काम करने गए थे। तभी कानपुर के एक पेट्रोल पंप पर ट्रक खराब होने पर ट्रक तीन दिन तक वहीं खड़ा रहा। इससे पति को लू लग गई।
ट्रक ठीक होने के बाद 14 जून रविवार को सुमेरपुर आया तो उसका पति ट्रक में ही अचेत होकर गिर पड़ा। ट्रक ड्राइवर उन्हें मौदहा के सरकारी अस्पताल भर्ती कराया। तब उसे सूचना दी गई कि पति की हालत ठीक नहीं है। जानकारी होने पर वह किराए के पैसे न होने पर राशन का पांच किग्रा चावल बेचकर मौदहा पहुंची। तो उसका पति मृत अवस्था में अस्पताल के बाहर पड़ा था।
किसी तरह से वह शव को लेकर गांव आई। पड़ोसी और सजातीय लोगों ने आपस में धनराशि एकत्र कर पति का अंतिम संस्कार किया।
पीड़िता ने बताया कि न्याय के लिए उसने सदर विधायक से गुहार लगाई, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। तब पति का पोस्टमार्टम कराने के लिए मुख्यालय के गोल चबूतरे में बैठ गई।
इस पर शुक्रवार को नायब तहसीलदार हिम्मत बहादुर, थानाध्यक्ष राकेश कुमार, क्राइम इंस्पेक्टर रामकुमार यादव गांव पहुंच कर जेसीबी से कब्र को खोदवाकर शव को निकला और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इस मौके पर मृतक की पत्नी सहित अन्य परिजन व गांव के लोग मौजूद रहे।