महोबा। छह दशक बाद भी शहर में बिजली की जर्जर लाइन नहीं बदली गईं। आज भी 60 साल पुरानी जर्जर एलटी लाइनों में विद्युत विभाग लकड़ी की कमटी बांधकर काम चला रहा है। इससे आए दिन तार टूटकर गिरते रहते हैं। बिजली लाइन के जर्जर तार न बदले जाने से लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
वर्ष 1957 में शहर में बिजली की लाइनें बिछाई गई थीं। उस समय केवल 100 कनेक्शन ही थे। अब यहां कनेक्शनों की संख्या बढ़कर 25 हजार से अधिक हो गई है। फिर भी आज तक महकमे ने जर्जर तारों को बदलने की पहल नहीं की है। आए- दिन व्यस्त मार्गों पर तेज स्पार्किंग के साथ बिजली के तार टूटकर गिर जाते हैं। टूटे तार जानलेवा साबित हो रहे हैं। हालाकि बिजली विभाग के कर्मचारियों ने बिजली के जर्जर तारों को सहारा देने के लिए लकड़ी की कमटियां बंाध दी है। तहसील चौराहे से हवेली दरवाजा मार्ग , ऊदल चौक रोडवेज मार्ग,मिशन रोड़ मार्ग के अलावा कबरई, कुलपहाड़,चरखारी और श्रीनगर सहित सभी कस्बों की गलियों में जर्जर लाइन खींची गई है। अक्सर हाईवोल्टेज से जर्जर तार टूटकर गिर जाते हैं। इससे हमेशा खतरा बना रहता है। विभागीय अधिकारियों ने आजतक जर्जर लाइन बदलने की जहमत नही उठाई। इससे लोग हमेशा हादसे की आशंका को लेकर सहमे रहते हैं। बिजली विभाग ने शहर के कुछ मोहल्लों में इंसुलेेटेड लाइन बिछाकर राहत दी है। जबकि शहर का बड़ा हिस्सा आज भी बिजली के जर्जर तारों से होने वाली परेशानी से जूझ रहा है। तार गिरने से कभी भगदड़ मचती है तो कभी मोहल्लेवासी तारों के टूटने पर खड़े होकर राहगीरों को होशियार करते रहते हैं जिससे दुर्घटना न घटे। बिजली विभाग ने शहर के मुख्य मार्गो और घनी बस्ती में इंसुलेटेड लाइन बिछाने के बजाय जंगल में इंसुलेटेड लाइनें बिछा दीं। यहां न तो बिजली चोरी होने की संभावना है और न तार टूटकर गिरने से जनहानि हो सकती है। और न ही वहां हाई वोल्टेज की समस्या है। विभाग ने आरटीओ आफिस से लेकर पान अनुसंधान केंद्र तक सागर कानपुर हाईवे पर इंसुलेटेड लाइन बिछा दी हैं, जबकि इस लाइन में चंद कनेक्शन ही हैं।