महोबा। यूं तो तमाम शहराें में यातायात कानूनाें का पालन किया जाता है, लेकिन जिले का अपना अलग ही यातायात कानून है। यातायात व्यवस्था सुधारने को बनाई गईं योजनाएं आधी अधूरी ही लागू हो सकीं। पुलिसकर्मियाें के सामने आड़े तिरछे वाहन खड़े कर सवारियां भरना डग्गामार वाहन चालकाें की आदत बन चुकी है। शहर में चौराहाें पर यातायात पुलिस कर्मियाें की मौजूदगी में वाहन चालक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना अपनी शान समझते हैं।
जिले में जगह-जगह बने चौराहाें पर ट्रैफिक सिपाहियाें की तैनाती न होने से चौराहे खाली रहते हैं। जिससे वाहन चालक मनमर्जी से वाहन चलाते हैं। बेतरतीब वाहन चलाने के चक्कर में अक्सर दुर्घटनाएं हो जाती हैं। इसका खामियाजा वाहन चालक के साथ-साथ राहगीराें को भी भुगतना पड़ता है।
शहर में रोडवेज बस स्टैंड, जिला अस्पताल समेत कई स्थानों पर नो पार्किंग जोन के बोर्ड है, लेकिन वह शोपीस साबित हो रहे हैं। आए दिन हो रही सड़क दुुर्घटनाओं से डग्गामार वाहन सबक नहीं ले रहे हैं। जान जोखिम में डालकर सफर किया जा रहा है। नाबालिग टेंपो चला रहे हैं, साथ ही 80 फीसदी लोगों के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं हैं। पुलिस कर्मी स्वयं यातायात नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। संसाधनों की कमी और उस पर अतिक्रमण यातायात नियमों का पालन कराने में रोड़ा बने हुए हैं। अतिक्रमण यातायात जाम की मुख्य वजह बने हुए हैं।