महोबा। खनन पट्टे के आवंटन और नवीनीकरण के लिए चक्कर लगा रहे पत्थर कारोबारियाें के लिए खुशखबरी है। मंगलवार को उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने शासन द्वारा खनन पट्टाें के आवंटन के लिए चालू की गई ई-टेंडर व्यवस्था को निरस्त कर दिया है। इससे जिले के कारोबारियाें को आसानी से पट्टाें के आवंटन की उम्मीद बढ़ गई है।
जिले की पत्थर व्यावसायिक नगरी कबरई में खनन पट्टाें से प्रदेश को हर साल करीब 80 करोड़ रुपए राजस्व मिलता है। जुलाई 2011 में तत्कालीन जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत के स्थानांतरण के बाद खनन पट्टाें के आवंटन और नवीनीकरण की प्रक्रिया ठप चल रही थी। इसी वर्ष स्थानांतरित होकर आए जिलाधिकारी मुथुकुमार स्वामी बी ने भी इस प्रक्रिया को गति नहीं दी जिससे खनन पट्टाें के लिए आवेदन करने के बाद कारोबारी विभाग के चक्कर काटते रहे लेकिन न तो उन्हें खनन पट्टाें का आवंटन हुआ और न ही नवीनीकरण हो सका। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 31 मई 2012 को खनन पट्टाें की नीलामी ई-टेंडर से करने का शासनादेश जारी किया था जिसके चलते सामान्य प्रक्रिया के तहत खनन पट्टाें के लिए आवेदन करने वाले कारोबारी भी खासे मायूस हो गए थे लेकिन व्यवस्था में तमाम खामियाें के चलते ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत खनन पट्टे नहीं हो सके और न ही पुराने पट्टाें का नवीनीकरण हुआ। इसके चलते प्रदेश की सर्वाधिक राजस्व देने वाली कबरई पत्थर मंडी में पट्टाें के आवंटन के लिए कारोबारी परेशान घूमते रहे। निराश होकर पत्थर मंडी कबरई के कारोबारियाें ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। जिसके बाद मंगलवार को हाईकोर्ट ने लघु खनिज से संबंधित पट्टाें की नीलामी ई-टेंडर के जरिए करने की शासन की नीति को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट की इस कार्रवाई से पट्टाें के आवंटन और नवीनीकरण की प्रक्रिया आसान हो गई है। इससे अब जिले के कारोबारियाें खनन पट्टाें के आवंटन की उम्मीद बढ़ गई है। स्टोन क्रेशर यूनियन के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह का कहना है कि हाईकोर्ट के इस फैसले से अब आसानी से खनन पट्टे मिल सकेंगे। साथ ही दो वर्ष से बंद चल रही खनन पट्टाें के आवंटन और नवीनीकरण की प्रक्रिया चालू हो सकेगी।