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अनशनकारियों ने गंगापुत्र को नम आंखों से दी श्रृद्धांजलि

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महोबा। पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर पिछले 107 दिन से अनशन पर बैठे बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर एवं जिला अधिवक्ता समिति के पूर्व अध्यक्ष सुखनंदन यादव ने अपने साथियों के साथ आल्हा चौक स्थित अनशन स्थल पर शोकसभा आयोजित की, जिसमें दो मिनट मौन रखकर गंगा नदी को बचाने के लिए अपनी देह त्याग करने वाले संत स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान समाजसेवियों ने सरकार के रवैये की आलोचना की। शोकसभा में बुंदेली समाज के संयोजक ने कहा कि स्वामी सानंद गंगा नदी को साफ-स्वच्छ व अविरल बनाने के लिए कई वर्षों से लड़ाई लड़ रहे थे। वे गंगा पर लगातार बन रहे बांधों के खिलाफ थे और ऋषिकेश में पिछले 113 दिन से अनशन पर थे लेकिन सरकार ने उनकी नहीं सुनी। उनकी मौत से मोदी सरकार के गंगा सफाई अभियान पर कलंक लग गया है। उनकी कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी। जिला अधिवक्ता समिति के महामंत्री चंद्रशेखर स्वर्णकार ने कहा कि स्वामी सानंद स्वयं वैज्ञानिक थे। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर रहे और लोग उनको प्रो. जीडी अग्रवाल के नाम से जानते थे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य रहे। उनकी बात भी मोदी सरकार ने नहीं मानी। पूर्व पालिकाध्यक्ष बती बाबू ने कहा कि बुंदेलखंड राज्य के लिए महोबा में चल रहा अनशन भी सौ दिन पार कर चुका है लेकिन सरकार के कान में जूं नहीं रेंग रही। इसका खामियाजा सरकार को भुगतना होगा। शोकसभा में पूर्व सैनिक कृष्णा शंकर जोशी, प्रेम साहू, सुभाष चौरसिया, पिंटू सक्सेना, श्रीपाल वर्मा, भागीरथ शर्मा आदि लोग मौजूद रहे। उधर मां चंद्रिका महिला महाविद्यालय में स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के निधन पर शोकसभा की गई, जिसमें प्राचार्य डा. ज्योति सिंह, निदेशक अभयवीर सिंह, अरेंद्र सिंह सहित तमाम प्रवक्ता व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
अनशनकारियों ने गंगापुत्र को दी श्रृद्धांजलि
- शोकसभा कर सरकार के रवैये की निंदा की
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