कबरई (महोबा)। डेढ़ साल से खनिज शासनादेश की कमियों का खामियाजा भोग रहे पट्टाधारकों को अब शासन ने राहत दे दी है। जिससे क्रशर मालिकों और पट्टाधारकों में क्रशर उद्योग फिर से सुचारु रूप से चलने के आसार बढ़ गए हैं। अभी प्रति हेक्टेयर दस हजार घनमीटर ई एमएम 11 रॉयल्टी मिलने का प्रावधान था। जिसे अब बढ़कर पूर्ववत उत्पादन के हिसाब से कर दिया गया है।
कबरई की क्रशर मंडी में एक साल पहले 5 से 6 हजार तक ट्रक गिट्टी लेने आते थे लेकिन दिसंबर 2017 के शासनादेश के तहत रॉयल्टी शासन ने देना कम कर दी थी। जिससे यहां गिट्टी लेकर जाने वाले ट्रकों को रॉयल्टी की कमी खलने लगी और ट्रक कबरई मंडी छोड़कर झांसी मंडी में जाने लगे। नतीजन कबरई क्रशर मंडी बंदी के कगार पर आ गई। सौ से अधिक क्रशर रॉयल्टी कमी के कारण बंद हो गए।
क्रशर यूनियन के लोगों ने निदेशक खनिज डॉ. रोशन जैकब और मुख्यमंत्री के सचिव से वार्ता कर रॉयल्टी कमी का रोना रोया और एमपी की मंडी गुलजार होने से खनिज राजस्व की क्षति के बारे में अवगत कराया। एक माह के लंबे विचार विमर्श के बाद शासन के प्रमुख सचिव हिमांशु कुमार ने 9 मार्च को जारी शासनादेश में 12 दिसंबर 2017 को जारी आदेश के प्रस्तर 23 तथा नियम 18 को संशोधित कर दिया। जिससे अब रॉयल्टी पूर्ववत खनन महायोजना के अनुसार मिल सकेगी। शासनादेश जारी होने से क्रशर व्यापारियों ने जहां राहत की सांस ली है। तो वहीं क्रशर मालिकों ने अपनी जीत बताया है।
अब पूर्ववत मिलेगी पट्टाधारकों को रॉयल्टी