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भारतीय संस्कृति विश्व संस्कृति की रीढ़-प्राचार्य

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महोबा। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के अध्ययन केंद्र वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय में चल रहीं तीन दिवसीय योग की परीक्षाएं एवं योगाभ्यास का समापन हो गया। अंतिम दिन छात्र छात्राओं की मौखिक एवं प्रेक्टिकल परीक्षाएं कराई गईं। योग परीक्षाओं के बौद्धिक सत्र में प्राचार्य प्रो. सुशील बाबू ने भारतीय संस्कृति, संस्कार एवं जीवन मूल्य विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व संस्कृति की रीढ़ है। भारतीय संस्कृति के आदर्श, संस्कार एवं ऋषि मुनियों के व्यवहारिक जीवन के आदर्श विश्व शांति में सहायक हैं। उनके आदर्शों को हमें अपने जीवन में आदर्श रूप में अपनाना होगा। समन्वयक डा. प्रदीप कुमार ने कहा कि आज दुनिया को निरोगी रहने के लिए योग शिक्षा का अनुशरण करना होगा। कार्यक्रम में डा. एलसी अनुरागी, डा. उमाशंकर त्रिपाठी सहित तमाम छात्र छात्राएं मौजूद रहे।
भारतीय संस्कृति विश्व संस्कृति की रीढ़-प्राचार्य
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