मुख्यमंत्री के अन्ना पशुओं को दस जनवरी तक आश्रय स्थलों पर भेजे जाने की मियाद खत्म होने के बाद भी खेतों और सड़कों पर बड़े पैमाने पर अन्ना पशु घूम रहे हैं। वहीं, जिला प्रशासन ने 16 हजार अन्ना पशुओं को गोशालाओं में भेजने का दावा किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को अन्ना पशुओं से राहत दिलाने के लिए 2 जनवरी को सभी जिलाधिकारियों को सड़कों व खेतों के आसपास घूम रहे अन्ना पशुओं को अभियान चलाकर दस जनवरी तक आश्रय स्थलों पर पहुंचाने के निर्देश दिए थे। शुरुआती दिनों में तो अभियान का खासा असर दिखाई दिया लेकिन धीरे-धीरे यह अभियान ठंडे बस्ते में चला गया।
दस जनवरी बीत जाने के बाद भी 50 फीसदी भी अन्ना जानवर आश्रय स्थलों पर नहीं पहुंच सके। जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। किसान खेतों में अन्ना जानवरों से फसल को बचाने के लिए दिन रात डेरा जमाए हुए हैं।
चरखारी तहसील में 23, कुलपहाड़ में 48 और महोबा में सात अस्थायी गोशालाओं की व्यवस्था कराई गई हैं। इन गोशालाओं में 200 से 650 तक पशुओं को रखने की क्षमता है। इन गोशालाओं में नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत के सफाई कर्मचारियों की मदद से अभियान चलाकर अन्ना पशुओं को पकड़ गोशालाओं में भेजा गया।
जिलाधिकारी सहदेव ने बताया कि 16 हजार अन्ना जानवरों को गोशालाओं में भेजा जा चुका है। साथ ही बताया कि 140 गांवों में अस्थायी गोशालाओं का निर्माण कराया गया है। डीएम ने बताया कि जिले में जानवरों को छुट्टा छोड़ने पर 14 लोगों को जेल भेजा गया है और 86 लोगों को नोटिस जारी किया गया है।
अन्ना पशुओं की सुरक्षा के लिए जिले के चारों ब्लाकों में 1.65 करोड़ की लागत से पांच गोशालाओं का निर्माण कराया गया। कबरई ब्लाक के खन्ना गांव, चरखारी ब्लाक के कुराराडांग गांव, जैतपुर ब्लाक के धवर्रा गांव व जैतपुर, पनवाड़ी ब्लाक के स्योड़ी गांव में गोशालाओं का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
जल्द ही यह गोशालाएं रंग-रोगन कर तैयार हो जाएंगी। इन गोशालाओं में 200-250 अन्ना पशुओं को रखने की क्षमता है। साथ ही गोशालाओं में पानी के लिए सबमर्सिबल पंप की भी व्यवस्था की गई है।
1.20 करोड़ रुपये की लागत से कार्यदायी संस्था पैक्स द्वारा करहरा कला में गोशाला का निर्माण कराया जाना है। जहां पांच सौ अन्ना पशुओं के रखने की क्षमता होगी। वहीं, चरखारी में 1.42 करोड़ रुपये की लागत से कान्हा गोशाला का निर्माण कराया जाना है। जिसका निर्माण कार्यदायी संस्था सीएनडीएस द्वारा होना है। दोनों गोशालाओं का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।
फसलाें को बचाने के लिए 27 दिसंबर को अन्ना जानवरों से परेशान होकर किसानों ने मवेशियों को खदेड़ते हुए तहसील चरखारी के अंदर कर दिए थे। बाद में एसडीएम ने कर्मचारियों को बुलाकर अन्ना जानवरों को बाहर निकाला और कुछ पशुओं को गोशालाओं में भर्ती कराया।
अन्ना पशुओं को बांधकर न रखने पर जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम सदर राजेश यादव ने चार जनवरी को खन्ना और सिचौंरा गांव के चार किसानों के खिलाफ धारा 151 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
इसी तरह पांच जनवरी को कोतवाली कुलपहाड़ में अन्ना पशुओं को बांधकर न रखने के मामले में एसडीएम कुलपहाड़ ने आठ लोगों पर कार्रवाई कर जेल भेजा था। वहीं, एसडीएम कुलपहाड़ जंगबहादुर ने मुनादी कराने के बाद भी पशुओं को आवारा छोड़ने पर आठ जनवरी को 37 पशुपालकों पर धारा 107 व 151 के तहत कार्रवाई की थी।
अन्ना पशुओं को अभियान चलाकर गोशालाओं में भेजा गया है। गांवों में बनाई गई अस्थायी गोशालाओं में चारे व भूसे की व्यवस्था करने के साथ उनकी देखरेख के लिए भी युुवाओं को लगाया गया है। हरे चारे और बरसी के लिए ग्राम पंचायत की भूमि पर व्यवस्था की जा रही है। -सहदेव, जिलाधिकारी महोबा।
सीएम का आदेश बेअसर, सड़कों और खेतों में घूमते मिले अन्ना पशु
10 जनवरी तक आश्रय स्थलों में अन्ना पशुओं के भेजने के दिए थे आदेश
प्रशासन का दावा 16 हजार पशु भेजे गए गोशाला