दारुल उलूम गौसिया रजविया के 8वें जश्न-ए-दस्तार हिफ्जोकिरात के साथ यौम-ए-मुफ्ती आजम बुंदेलखंड हसीबउद्दीन कांफ्रेंस के अवसर पर 19 हाफिज व कारी के सिर दस्तार बांधकर उन्हें उलमा-ए-दीन ने सनद व डिग्री दी। इस मौके पर मुफ्ती-ए-आजम बुंदेलखंड की जिंदगी पर लिखी गई किताब का भी विमोचन हुआ।
काजीपुरा मैदान में आयोजित जश्न-ए- दस्तारबंदी के मौके पर मलेशिया के कारी बदरुलदुजा, नोमान कटनी, अख्तर सुल्तानी, मुफ्ती मोहम्मद हनीफ कानपुर, हाफिज कारी मो. आमिर बिहार, मो. ताहिर, मुफ्ती-ए-आजम कर्नाटक अनवर, हनीफ बरकाती कानपुर, अल्लामा मौलाना अब्दुल सत्तार मुंबई, खुशतर रब्बानी बांदा के अलावा शायर सलमान रजा रायपुर, नसीम अख्तर कानपुर, साजिद रजा बांदा ने आवाम से खिताब कर शरियत की पाबंदी आलमों व उलमाओं की इज्जत तहजीब, इखलाक पर रोशनी डालते गैर शरई कार्यों से बचने की नसीहत दी। उलमाओं ने पैगंबर मोहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलने की नसीहत दी।
कार्यक्रम में उलमाओं ने हाफिज कारी की अहमियत बताते हुए कहा कि हर कोई हाफिज नहीं बन सकता जिसे अल्लाह चाहता है उसी को हाफिज बनने का तोहफा मिलता है। तीन तलाक पर भी यहां उलमाओं ने मुस्लिमों के गैर शरई तलाक देने के कारण कोर्ट सहित पार्टी और सरकार के इसमें दखल को कारण बताया। कहा कि हिंदू समाज में व्यक्ति की मौत के बाद उसे जलाया जाता है। इस पर कभी आवाज नहीं उठी दखल नहीं दिया गया क्योंकि इस पर उक्त कौम को कोई न ऐतराज है और न ही इस पर कोई हिंदू समाज दो राय रखता है। कहा कि यदि मुस्लिम भी तलाक के मुद्दे पर शरई कानून और शरियत के तहत अमल पैरा होते तो इसमें दूसरे को दखल की जरूरत न होती।
इस मौके पर शायर शकील, इकलाक, नसीम अख्तर आदि ने नातिया कलाम पेश कर लोगों को झूमने को मजबूर किया। जिन हाफिज कारी की यहां दस्तारबंदी हुई उनमें मुईनुद्दीन जुमा बाजार महोबा के अलावा अशफाक बांदा, सलमान खान हरदौली बबेरू, मो. जाकिर हुसैन कबरई, तौहीद निवासी लौहरेटा नरैनी, कमरूद्दीन बहराईच आदि 19 शामिल है।
इस मौके पर आयोजक मौलाना जमालुद्दीन ने बताया कि जिन 19 की दस्तारबंदी की गई है वह सभी दारुल उलूम गौसिया रजविया के वह तालिबइल्म है। जिन्होंने कई सालों की मेहनत के बाद हाफिज और कारी का कोर्स पूरा किया। मदरसे के प्रबंधक अब्दुल खालिक के अलावा इस मौके पर शहर महोबा के तमाम उलमा काजी-ए-शहर आफाक हुसैन और हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।