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कर्ज और बीमारी से परेशान श्रमिक ने आग लगा दी जान

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महोबा। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम करहराकला में कर्ज और बीमारी से परेशान श्रमिक ने आग लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक पिछले दो साल से गले के कैंसर से पीड़ित था। परिजनों ने करीब दो लाख रुपये इलाज में लगा दिया। इसके बाद एक लाख रुपये साहुुकारों से लेकर लगा दिया। इसके बाद भी हालत में सुधार न होने पर उसने रविवार को आग लगाकर जान दे दी। जबकि मृतक की पत्नी और पुत्र पर पशुपालन का बैंक से एक लाख रुपये कर्ज था। सूचना पर पुलिस ने मृतक के शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
ग्राम करहराकला निवासी दुलीचंद्र (45) पुत्र बालादीन भूमिहीन है। वह मेहनत मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण कर रहा था। करीब दो साल पहले दुलीचंद्र को गले में कोई बीमारी हो गई थी। पहले झांसी फिर ग्वालियर में इलाज कराया गया। जहां पर कैंसर के संकेत बताए जाने पर दिल्ली में इलाज कराया। जिससे घर का सारा पैसा इलाज में कर्ज हो गया। वर्ष 2017 में एक लाख रुपये साहूकारों से कर्ज लेकर भी लगा दिया गया, लेकिन हालत बिगड़ती गई। जिससे उसे कुछ माह पहले घर लाया गया। रविवार को उसने घर पर आग लगाकर जान दे दी। दुलीचंद्र की पत्नी जनकिया व पुत्र प्यारेलाल ने वर्ष 2016 में यूनियन बैंक से 50-50 हजार रुपये का पशुपालन के लिए कर्ज लिया था। जिसकी अदायगी नहीं हो पा रही थी। कर्ज की अदायगी की चिंता में किसान परेशान रहता था। रविवार को तड़के सबुह दुलीचंद्र ने मकान के कमरे में अपने शरीर पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। गंभीर हालत में परिजनों द्वारा उसे जिला अस्पताल लाया गया। जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के चार पुत्र व एक पुत्री है। पुत्री की शादी हो चुकी है।
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मृतक के बेटे प्यारेलाल ने बताया कि पिता कर्ज की अदायगी की चिंता के साथ साथ बीमारी से भी काफी परेशान रहते थे। जिससे उन्होंने आग लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना से मृतक के परिजनों में कोहराम मचा है। कोतवाली प्रभारी विक्रमाजीत सिंह का कहना है कि मृतक बीमार रहता था। जिससे उसने आत्महत्या की है। घटना की पूरी जांच कराई जा रही है। ग्राम प्रधान करहराकला पंचम कुशवाहा का कहना है कि मृतक किसान बीपीएल कार्डधारक था। लंबे समय से कैंसर की बीमारी होने से परिवार के लोग पूरी जमापूंजी लगा चुके थे। बीमारी ठीक न होने पर उसने यह कदम उठाया।
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बीमारी से तंग आकर लगाई आग
उपजिलाधिकारी महोबा राजेश कुमार का कहना है कि मामला संज्ञान में आने के बाद लेखपाल और कानूनगो को भेज जांच कराई है। जांच दौरान पाया गया कि वह किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित था। उसके ऊपर किसी भी बैंक का कोई कर्ज नहीं है। मौत की वजह बीमारी बताई गई है।

कर्ज और बीमारी से परेशान श्रमिक ने आग लगा दी जान
- पशुपालन को बैंक से लिए गए कर्ज की भी नहीं हो पा रही थी अदायगी
- मेहनत मजदूरी करके परिवार का चल रहा था भरण पोषण
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