महोबा। अब आधार कार्ड बनवाना किसी जंग जीतने से कम नहीं है। जिले के ग्रामीणांचलों से आधार कार्ड बनवाने के लिए ग्रामीण सर्द मौसम में बैंकों के गेट पर रात से डेरा जमा लेते हैं। जिससे उनका नंबर आ सके।
तमाम ग्रामीण बिना आधार कार्ड बनवाए बैरंग लौट जाते हैं। आधार कार्ड न बनने से ग्रामीणों में खासा गुस्सा है। कई बार चक्कर काटने के बाद भी आधार कार्ड न बनने से आहत लोग घर बैठ गए हैं।
पहले प्राइवेट सेक्टर से आधार कार्ड बनते थे। छह माह पहले सरकार ने प्राइवेट सेक्टर से आधार कार्ड बनवाना बंद कर दिया है और इसकी जिम्मेदारी बैंक और डाकघर को सौंप दी है। पोस्टऑफिस महोबा, एसबीआई, सिंडीकेट बैंक, एचडीएफसी बैंक में आधार कार्ड बनाए जाने के आदेश जारी किए गए थे।
डाकघर के पोस्टमास्टर का कहना है कि डाकघर में संसाधन उपलब्ध नहीं है इसलिए यहां पर आधार कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं। उधर एसबीआई के प्रबंधक ने आधार कार्ड बनाने वाला काउंटर ही बंद कर दिया है। बैंक प्रबंधक का कहना है कि स्टाफ न होने के कारण आधार कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं।
जिले में सिर्फ एचडीएफसी और सिंडीकेट बैंक में आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं। इन बैंकों में सिर्फ एक दिन में 25-25 बनाने का लक्ष्य रखा है जबकि जिलेभर से सैकड़ों ग्रामीण प्रतिदिन बैंकों में आधार कार्ड बनवाने के लिए आ रहे हैं।
मकनियापुरा निवासी कमरुन का कहना है कि वह अपनी बहू के आधार कार्ड का पता बदलवाने के लिए रात में एक बजे से नंबर लगाए हैं। खरेला निवासी कौशल किशोर, मझलवारा निवासी बालेंद्र कुमार ठंड के बाद भी रात में तीन बजे बाइक से एचडीएफसी बैंक पहुंच गए। ननवारा निवासी अनीता, रचना, नंदकिशोर भी पूरी रात डेरा जमाए रहे।
-आधार कार्ड बनवाने के लिए रात से जमा लेते हैं डेरा
अमर उजाला ब्यूरो