महोबा। मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के मकसद से सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन चिकित्सकों की मनमानी से लोगों को बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल के कक्षों से डाक्टरों के अक्सर गायब रहने से इलाज के लिए आने वाले मरीज घंटों इंतजार के बाद बैरंग वापस लौटने को मजबूर है। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने अस्पताल की पड़ताल की तो चारों ओर अव्यवस्थाएं नजर आई और इलाज कराने पहुंचे मरीज बेहाल दिखे।
मौसम में बदलाव होने से संक्रामक बीमारियों के मरीजों में तेजी से इजाफा हुआ है। यहीं वजह है कि जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन एक हजार से 1200 नए मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। पर्चा बनवाने और दवाएं लेने के लिए लोगों को लंबी कतार में लगकर घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में 25 डॉक्टरों के सापेक्ष महज 13 डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है, वहीं पैरामेडिकल स्टॉफ की भी भारी कमी है। जिससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
शुक्रवार को जिला अस्पताल पहुंची अमर उजाला टीम ने मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की पड़ताल की। ओपीडी के बाहर एकल खिड़की में पर्चा बनवाने को लेकर लोगों में होड़ मची रही। अंदर घुसते ही चेयर में लेती महिला दर्द से कराह रही थी। पूछने पर महिला ने अपना नाम सावित्री पत्नी शुघर सिंह निवासी मसूदपुरा पनवाड़ी बताया। महिला ने बताया कि वह 40 किमी दूर से इलाज कराने के लिए सुबह नौ बजे अस्पताल आई थी, लेकिन संबंधित डॉक्टर 12 बजे तक नहीं आए। जिससे उसके सीने में तेज दर्द हो रहा है। डाक्टर के कक्ष में घुसने पर एक दर्जन से अधिक मरीजों के पर्चे टेबिल में रखे थे, लेकिन डाक्टर की कुर्सी खाली दिखी। अन्य कक्षों में चिकित्सक मरीजों को देखते नजर आए। करहरा निवासी देवकी व सालट निवासी रामजीवन को डॉक्टरों ने बाहर से महंगी दवाई लाने का पर्चा थमाया।
इंसेट
सुविधा शुल्क न देने पर हुई खानापूर्ति
महोबा। थाना श्रीनगर के ग्राम बिलरही निवासी मंगल पुत्र जानकी यादव दूध बेचने के लिए बाइक से महोबा आ रहा था। रास्ते में बाइक फिसल जाने से वह घायल हो गया। सूचना पर परिजन उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल लाए। मंगल ने आरोप लगाया कि पट्टी व उपचार के नाम पर कर्मचारियों ने सुविधा शुल्क की मांग की। पैसे न देने पर पैर में साधारण पट्टी बांध दी और हाथ व अन्य स्थानों की चोटों को देखा तक नहीं और उसे घर जाने की सलाह दी। बाद में युवक ने प्राइवेट क्लीनिक में उपचार कराकर दवाएं ली।
इंसेट
जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं दिलाई जा रही है। डाक्टरों को समय से कक्षों में बैठने की हिदायत दी गई है। यदि ड्यूटी के दौरान चिकित्सक गायब मिलते है तो कार्रवाई की जाएगी। कर्मचारियों द्वारा सुविधा शुल्क वसूले जाने की उन्हें जानकारी नहीं है। शिकायत मिली तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएंगी।
डॉ. उदयवीर सिंह
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
जिला अस्पताल, महोबा
.............
हाल ए जिला अस्पताल, चिकित्सक गायब मरीज बेहाल
-मौसम बदलने से ओपीडी में प्रतिदिन पहुंच रहे 1200 नए मरीज
-50 फीसदी डाक्टरों और कर्मचारियों के रिक्त चल रहे हैं पद