लॉकडाउन के के बाद घर लौट रहे करीब 1200 प्रवासी मजदूरों का यूपी-एमपी के बार्डर पर जांच कराने के बाद निजी वाहनों से आए और आठ रोडवेज की बसें लगाकर सभी प्रवासियों को उनके गृह जनपद भेजा गया। अभी भी बार्डर पर श्रमिकों के आने का सिलसिला जारी है।
बैंगलुरू, महाराष्ट्र से ट्रकों व निजी वाहनों में आए 1200 श्रमिकों को कैमाहा बार्डर पर रोक लिया गया। ट्रकों से आए सभी श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग कराने के बाद रोडवेज बसों से भदोही, गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, गोंडा, प्रतापगढ़, कौशांबी संतकबीर नगर और मिर्जापुर के लिए भेज दिया।
चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों ने ट्रक से आए श्रमिकों का बुरा हाल हो गया। सभी श्रमिकों को बार्डर पर भोजन कराने के बाद उन्होंने गृह जनपद के लिए रवाना किया। इसके अलावा अपने निजी वाहनों से आए श्रमिक भी गृह जनपद के लिए भोजन करने के बाद निकल गए।
भदोही निवासी श्रमिक राजेश कुमार गुप्ता का कहना है कि वह अपने परिवार के साथ आठ माह पहले बैंगलुरू गया था। जहां पर गारमेंट कंपनी में काम करता था। लॉकडाउन के चलते जो पैसा कमाया था।
वह दो महीने में खर्च हो गया। मकान मालिक ने भी किराया न देने पर घर खाली कराने की चेतावनी दे दी। इससे मजबूरन अपने घर को आना पड़ा।
मिर्जापुर निवासी ज्ञानचंद्र कहते है कि बैंगलुरू में काम अच्छा चल रहा था। लेकिन वैश्विक कोरोना महामारी के चलते घर आना पड़ा।
उनका कहना है कि अब वह अपने जिले में ही मजदूरी का काम कर परिवार का पालन-पोषण करेंगे लेकिन बाहर कमाने नहीं जाएंगे। उन्होंने जो दुश्वारियों बैंगलुरू में झेली हैं उसे भूल नहीं सकते।