महोबा। अपर जिला सत्र न्यायाधीश एफटीसी 2016 संतोष कुमार मौर्या ने जानलेवा हमला करने के मामले में एक ग्रामीण को सात साल की सजा सुनाई। साथ ही नौ हजार रुपये का जुर्माना ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। अदालत ने दोषी को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया है।
9 अप्रैल 2010 को थाना अजनर के ग्राम कैथोरा में शाम 7.30 बजे देवकीनंदन पुत्र कमलापत राजपूत गांव में हरगोविंद अहिरवार की दुकान पर मोबाइल रिचार्ज कराने जा रहा था। तभी रास्ते में बहादुर सिंह और उसका भाई रहीस लाठी और तमंचा लेकर आ गए। इसी बीच बहादुर ने ग्रामीण पर तमंचे से फायर झोंक दिया, जिससे छर्रे उसके हाथ में लगे। वह खून से लथपथ होकर गिर गया। बाद में उसे जिला अस्पताल लाया गया। घायल देवकीनंदन घटना की रिपोर्ट रहीस और उसके भाई बहादुर सिंह के खिलाफ थाना अजनर में दर्ज करा दी थी।
शुक्रवार को विद्वान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के गवाह और बहस सुनने के बाद बहादुर सिंह को जानलेवा हमला करने का दोषी ठहराते हुए उसे सात साल की सजा सुनाई। साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना ठोंका। धारा 506 में एक साल की सजा एक हजार रुपये जुर्माना, धारा 504 में 6 माह की सजा और 500 रूपये जुर्माना, 7 क्रिमिनल ला में 6 माह की सजा पांच सौ रुपये जुर्माना, 25 आर्म्स एक्ट में दो साल की सजा और दो हजार रुपये जुर्माना ठोंका। इस मुकदमें की पैरवी करते हुए शासकीय अधिवक्ता शिवरतन वर्मा ने बताया कि सभी सजा साथ साथ चलेगी। उन्होंने बताया कि इसी मुकदमे में एक सप्ताह पहले दोषी बहादुर सिंह के भाई रहीस सिंह को सात साल की सजा सुनाई गई थी और बहादुर फरार चल रहा था। अदालत में हाजिर होने पर उसे भी सात साल की सजा सुनाई गई।
जानलेवा हमला करने के मामले में ग्रामीण को सात साल की सजा
-अदालत ने दोषी पर नौ हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका