महराजगंज। डी फार्मा की डिग्री लेकर युवा स्वरोजगार कर अपनी आमदनी बढा रहे हैं। डी फार्मा की डिग्री लेने के बाद अधिकतर युवाओं ने खुद का मेडिकल स्टोर खोल लिया है। फार्मेसी व्यवसाय का सीधा संबंध मानव स्वास्थ्य से है। मध्यमवर्गीय परिवार के युवा इंटर की पढ़ाई करने के बाद आसानी से डी फार्मा का कोर्स करके स्वरोजगार अपना रहे हैं। डी फार्मा युवाओं की पसंद बन रहा है।
आईटीएम कालेज ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि इस कोर्स के लिए न्यूनतम योग्यता कक्षा 12 वीं विज्ञान है। डिप्लोमा इन फार्मेस के झेत्र मेें जहां आज के समय में मेडिकल क्षेत्र में विभिन्न कॅरिअर विकल्प देखने को मिलते हैं। वहीं, डी फार्मा कोर्स मेडिकल साइंस के छात्रों की पहली पसंद के रूप में उभर रहा है। मेडिकल क्षेत्र में कम समय में कोर्स का चयन करने की सोच रखने वाले विद्यार्थियों के लिए डी फार्मेसी अच्छा विकल्प है। डिप्लोमा कोर्स की अवधि दो साल होती है। इसके अंतर्गत छात्रों को विभिन्न फार्मास्युटिकल दवाओं एवं उनके निर्माण के पीछे की बुनियादी प्रक्रियाओं के बारे में जानने को मिलता है। इसके साथ ही यह कोर्स चिकित्सा प्रबंधन के कई सिद्धांतों को भी शामिल करता है।
इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए कोई विकल्प समझ में नहीं आ रहा था, फिर डी फार्मा करने का विचार आया। घर वाले भी तैयार हो गए। दो साल में कोर्स पूरा कर खुद का मेडिकल स्टोर खोल लिया हूं। इससे अच्छी आमदनी होती है।
- अजय कुमार सिंह, श्यामदेउरवां
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डी फार्मा कोर्स करने के बाद सरकारी नौकरी पाने का प्रयास कर रहा हूं। साथ ही साथ एक निजी मेडिकल स्टोर भी संचालित करता हूं, जिससे अपनी तैयारी के साथ-साथ घर का खर्च भी निकल जाता है।
- देवेश त्रिपाठी, परतावल
अभी जल्द ही डी फार्मा कोर्स पूरा हुआ है। प्रशिक्षण चल रहा है, इसे करने के बाद एक मेडिकल स्टोर खोलने की तैयारी है। कहीं नौकरी ढूंढने से अच्छा स्वरोजगार करना है।
- रवि त्रिपाठी, महम्मदा
डी फार्मा कोर्स के बाद से घर के कुछ ही दूरी पर मेडिकल स्टोर खोला है। मेडिकल स्टोर से अच्छी आमदनी हो जाती है। इसके साथ ही आगे की तैयारी भी कर रहा हूं।
- बृजेश कुमार, गोधवल