महराजगंज। महाव तटबंध को मजबूत बनाने के लिए सिंचाई विभाग ने 30 लाख खर्च कर डाले, लेकिन बीते दिनों पानी का दबाव नहीं सह सका और तटबंध 10 मीटर टूट गया। इससे कार्य के गुणवत्ता की पोल खुल गई है। रेतयुक्त मिट्टी से किनारों को मजबूत कर खानापूरी कर दी गई। इस मामले की जांच अब विभाग की ओर से की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, 22 अगस्त को नाले का जलस्तर बढ़ गया। ग्राम देवघट्टी हरखपुरा के पास कमजोर किनारा पानी का दबाव सह नहीं सका। मामले में अवर अभियंता विवेक कुमार शुक्ला और विवेक कुमार भारद्वाज को हटा दिया गया है। इनके स्थान पर अवर अभियंता अमित कुमार, शशांक पांडेय और वसीम अहमद को तैनात किया गया है। नेपाल से निकलकर झिंगटी गांव के पास से भारतीय क्षेत्र में महाव नाला प्रवेश करता है।
कुल 23 किमी लंबाई में बहने वाले महाव नाले का 15 किमी भाग जंगल के बाहर पड़ता है। लोगों ने की माने तो नाले की सिल्ट से बनाया गया इसका तटबंध कई स्थानों पर मजबूत नहीं है। इसमें 65 से अधिक खतरनाक मोड़ भी है। नाले का आठ किमी भाग मधवलियां व चौक उत्तरी रेंज के घने जंगल से होते हुए करौता गांव के पास बघेला नाला में मिल जाता है। जंगल में नाले के प्रवाह मार्ग उगे पौधों व झाड़ियों के कारण प्रवाह मार्ग सकरा हो जाता है। समस्या के समाधान के लिए सिंचाई विभाग जंगल के बाहर व वन विभाग जंगल के अंदर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च कर सिल्ट सफाई कराता है। महाव नाले के दायरे में बरगदवा क्षेत्र के बरगदवा, देवघट्टी, हरखपुरा,शिकारगढ़ नरायनपुर, हरपुर, अमहवा, बेलहिया, खजहिया ,गनेशपुर आदि गांव प्रभावित होते हैं। जबकि पश्चिमी तटबंध टूटने से खैरहवा दूबे, कोहरगड्डी, असुरैना, दोगहरा, विशुनपुरा ,जहरी, सागरहवा, महरी घोड़हवा, लुठहवा, गंगवालिया आदि गांव आते हैं।