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कमजोर हो रही कुपोषण से लड़ने की जंग

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कमजोर हो रही कुपोषण से लड़ने की जंग
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महराजगंज। शासन की ओर से कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के लिए तरह तरह की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। जिले में इसका खास असर नहीं दिख रहा है। बच्चों को सुपोषित बनाने में विभाग हांफ रहा है। योजना के तहत कुपोषित बच्चों को लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है। बीते दिनों मधवलिया गोसदन से दो परिवारों को गाय दी गई। कुपोषित बच्चों को दूध मिल सके। लाभ प्रयास के बाद भी कुपोषण के जंग लड़ने में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग को पसीना आ रहा है।
सितंबर माह में सुपोषण योजना के तहत कुल 3133 केंद्रों पर बच्चों का वजन कराया गया। पांच साल तक के 26448 बच्चे कुपोषित मिले। वहीं 5494 बच्चे अति कुपोषित मिले हैं। साथ ही 215 बच्चे सैम (गंभीर अति कुपोषित) श्रेणी के मिले हैं। जिले में पांच साल से कम उम्र के बच्चे किसी प्रकार से कुपोषण के शिकार न हों, उसके लिए बीते सितंबर माह में सुपोषण माह संचालित किया गया। इसमें विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सुपरवाइजर, सीडीपीओ आदि घर-घर लोगों को जागरूक किया। अभियान के तहत पोषण की स्थिति की जानकारी के लिए जिले में पांच वर्ष तक के 22,2718 बच्चों का वजन कराया गया तो इसमें सामान्य श्रेणी में 190775 बच्चे मिले। वहीं पीला श्रेणी (कुपोषित) 26448 और लाल (अति कुपोषित) क्षेणी में 5495 बच्चे मिले हैं। वहीं सैम (गंभीर अति कुपोषित) श्रेणी के तहत सभी ब्लॉकों में कुल 215 बच्चे मिले हैं। मिठौरा ब्लॉक में सर्वाधिक 1090 बच्चे अति कुपोषित हैं। सबसे कम महराजगंज शहर केंद्र से जुड़े 35 बच्चे अति कुपोषित हैं।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी शैलेंद्र कुमार राय ने कहा कि अति कुपोषित व अति गंभीर कुपोषित बच्चों में पोषण की स्थिति के सुधार के लिए संबंधित सीडीपीओ, सुपरवाइजर व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जरूरी निर्देश दिया गया है। गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। गंभीर अति कुपोषित बच्चों के परिवार में पेयजल, शौचालय, जॉब कार्ड, पूर्ण टीकाकरण आदि के बारे में जांच की जा रही है। (संवाद)
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जरूरत के अनुसार मिलता भोजन
पोषण पुनर्वास केंद्र में तैनात पोषण विशेषज्ञ पूजा तिवारी ने बताया कि कुपोषित बच्चों की उनकी जरूरत के अनुसार भोजन दिया जाता है। इसके लिए मानक तय है। साबुदाना, दलिया, दूध, फल, खिचड़ी, सूजी का हलवा, खीर मानक के अनुसार दिया जाता है। 27 मई से अब तक 48 बच्चे भर्ती हुए, जिसमें 42 सुपोषित होकर घर भेज दिए गए। सात बच्चे वर्तमान में भर्ती हैं। उनकी बेहतर ढंग से देखभाल की जा रही है।
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