खाड़ी देशों में फंसे हैं नौतनवा के लोग, परिजनों से घर लौटने के लिए जरूरी इंतजाम करने को कहा
वापस अपने वतन और परिवार में लौटने को तड़प रहे खाड़ी देशों में फंसे लोग
नौतनवा। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग की चिंगारी काफी तेजी से आसपास के देशों में भी फैल रही है। ईरान खाड़ी के सभी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संपत्तियों को लगातार निशाना बना रहा है। इसके कारण हालत बिगड़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में इन स्थानों पर आजीविका के लिए नौतनवा क्षेत्र के नागरिकों को सुरक्षा की चिंता सता रही है। यहां मौजूद उनके परिजन भी काफी परेशान हैं।
इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग हर बीतते दिन के साथ गंभीर होती जा रही है। युद्ध की वजह से जनपद के कई नागरिक खाड़ी देशों में फंसे हैं। यहां परिजन उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। सोशल मीडिया पर मिसाइल और ड्रोन के हमलों के वीडियो देख लोग और भी सहम जा रहे हैं। धमाके भले ही खाड़ी के देशों में हो रहे हैं लेकिन उनकी गूंज ने यहां तक महसूस की जा रही है। परिजन अपनों के सलामती और वापस सुरक्षित लौटने की दुआएं ही मांग रहे हैं।
नौतनवा क्षेत्र के ग्राम सिंहोरवा निवासी पलटू ने बताया कि उनका पुत्र राकेश इस समय दुबई में है और उसकी पत्नी व बच्चे गांव में हैं। जबसे वहां के हालत खराब हुए हैं बच्चों के मन में भी डर बैठ गया है। अभी आठ माह पूर्व ही बेटा वहां गया है। फोन पर बात भी बहुत कम हो पा रही है। राकेश ने फोन पर वापस भारत लौटने के लिए कागजी प्रक्रिया पूर्ण कराने को कहा है। बेटे ने बताया कि वहां के हालत ठीक होते नहीं दिख रहे। पेट पालने को नौकरी पा जा रहे हैं लेकिन हर पल यह डर बना हुआ है कि उनके साथ कहीं कुछ हो गया तो परिवार का क्या होगा।
नौडिहवा निवासी अनिरुद्ध ने बताया कि उनके बड़े भाई विनोद कुवैत में मजदूरी और प्रमोद दुबई में रहकर पेंटर का काम करते हैं। दोनों भाइयों को वहां काम करते करीब 6 से 7 वर्ष हो गए हैं लेकिन आज तक ऐसी स्थिति नहीं आई थी। बड़े भाई ने कुवैत से मिसाइल गिरने की जो वीडियो भेजी है उसे देखकर हम सभी के रोंगटे खड़े हो गए हैं। भैया से बात हुई तो उन्होंने जैसे-तैसे भारत बुलाने का प्रबंध करने को कहा है। वहां दिन और रात सिर्फ धमाके ही हो रहे हैं। आंखों के सामने मिसाइलें मौत बनकर गरज रही हैं। कुवैत में जहां विनोद हैं उनके कमरे से महज कुछ दूरी पर ही धमाके हो रहे हैं। अनिरुद्ध ने बताया कि बस किसी तरह दोनों भाई सुरक्षित वापस आ जाएं इसी प्रयास में हम सब लगे हुए हैं।