महराजगंज। सदर तहसील के खुटहां-मुड़िला मेंं वक्फ संपत्ति के दायरे में कभी 300 एकड़ की कृषि भूमि के साथ 20 एकड़ में आम का बगीचा था। वक्फ संपत्ति रही उक्त भूमि खूनीपुर मस्जिद गोरखपुर साहबगंज की मिल्कियत रही।
इसकी देखरेख के लिए मुतवल्ली तैनात किए गए थे, लेकिन 1988 के बाद देखरेख करने वाले ने मस्जिद की तरफ से तैनात संरक्षक के रूप में धीरे-धीरे न सिर्फ अपना और अपने परिजनों का नाम चढ़ावा लिया बल्कि बाजार भाव से काफी कम रेट पर बिक्री भी कर डाली। मौजूदा समय में यहां सिर्फ 3.49 हेक्टेयर भूमि ही ऐसी है जो साहबगंज खूनीपुर के संरक्षण में राजस्व अभिलेखों में अंकित है।
वक्फ की संपत्ति का उपयोग कभी सामुदायिक उत्थान के लिए किया जाता रहा। वक्फ की संपत्ति से होने वाली आय से मस्जिद व मदरसों का प्रबंधन व आयोजन इत्यादि किया जाता था। इसी उद्देश्य से खूनीपुर स्थित मस्जिद के लिए खुटहां-मुड़िला की वक्फ संपत्ति प्रयुक्त होती थी। 1988 से पहले जिन्हें यह जिम्मेदारी मिली उन्होंने तो बतौर संरक्षक अपनी उपयोगिता सिद्ध की, लेकिन इसके बाद जिन्हें मुतव्वली बनाया गया उन्होंने विभिन्न प्रपत्र व आदेश के सहारे वक्फ संपत्ति को अपने व परिवार वालों के नाम चढ़वाकर अपने नाम का परचम लहराने का कार्य किया।