सिंचाई के लिए नहर में पानी का इंतजार
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महराजगंज। कभी सूखा तो कभी बाढ़ किसानों की मुश्किल बढ़ा देती है। इन दिनों नहर में पानी नहीं होने के चलते किसान धान की नर्सरी पंपिंग सेट चलाकर लगाने से परेशान हैं। इससे किसानों खेती करने ेक लिए आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उधर, किसानों की समस्याओं को लेकर विभाग गंभीर नहीं है।
जिले में एक लाख 63 हजार 313 हेक्टेयर धान की खेती होती है। मक्के की खेती 29 हेक्टेयर होती है। जिले में नहरों का जाल बिछा हुआ है। बावजूद इसके नहरें सूखी पड़ी है। नहर में समय से पानी नहीं आने के चलते किसानों की जेब ढीली हो रही है। क्षेत्रीय लोगों ने नहरों में पानी छोड़ने की लगातार मांग की बावजूद नहरें सूखी पड़ी हैं। गिदहा गांव के किसान सुदामा पटेल ने बताया कि नहर में पानी नहीं आया है। जिससे पंपिंगसेट से पानी चलाकर बेहन डालना पड़ रहा है। महंगाई के इस दौर में खेती करना मुश्किल हो गया। किसान वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि जब जरूरत होती है तो नहर में पानी ही नहीं रहता है। जब बेहन पड़ जाएगा तो पानी आकर क्या होगा। सरकार किसानों के हित की बात करती है। लेकिन हकीकत कुछ और ही है।अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड प्रथम सुरेश कुमार का कहना है कि जिले में 1035 किमी लंबी नहर है। 1 जून से नहर में पानी छोड़ा जाएगा। इसके लिए तैयारियां जोरों पर है। किसानों को खेत की सिंचाई में परेशानी न हो, इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है।