फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड जांच बंद, प्राइवेट सेंटरों की चांदी

विज्ञापन
महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्षा बंद। - फोटो : MAHARAJGANJ
विज्ञापन
सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड जांच बंद, प्राइवेट सेंटरों की चांदी
विज्ञापन

जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक में नहीं हो रही अल्ट्रासाउंड जांच
महराजगंज। जिले के सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो पा रही है। इस कारण निजी अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों की चांदी है। जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीज भी निजी सेंटरों में अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए मजबूर हैं। हालांकि, निजी सेेंटरों की जांच सवालों के घेरे में होती है, लेकिन लोगों को जांच करानी पड़ रही है और उसी आधार पर लोगों का इलाज भी किया जा रहा है।
जिले के दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों नौतनवां और बनकटी में अल्ट्रासाउंड जांच की मशीनें तकरीबन छह साल से धूल फांक रही हैं। इसके अलावा और किसी सीएचसी और पीएचसी में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। जिला अस्पताल एवं महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की मशीनें हैं, लेकिन उन्हें संचालित करने वाला तकनीशियन नहीं हैं। जिला अस्पताल से डॉ. आईडी चौधरी, डॉ. सुनील पासवान का इसी साल 30 जून को तबादला हो गया। डॉ. अनिल कुमार राय को 17 अगस्त को कार्यभार ग्रहण करना था, लेकिन वह नहीं आए, तो एडी हेल्थ गोरखपुर ने गोरखपुर से डॉ. बीके सिंह एवं डॉ. एके सिंह को अटैच किया। ये दोनों डॉक्टर भी अब तक ज्वाइन नहीं किए हैं। इस वजह से जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन

यही हाल महिला अस्पताल का है। यहां पर अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन उसे संचालित करने के लिए तकनीशियन नहीं है। प्रशिक्षण प्राप्त डॉ. निशा गुप्ता का तबादला होने के बाद अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। इस अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली 50 से अधिक महिलाएं प्रतिदिन निजी सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए विवश हैं।
उधर, निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जांच कराने वालों की लाइन लगी रहती है। सुबह नंबर लगाने पर दोपहर बाद अल्ट्रासाउंड कराने का मौका मिलता है। 100 से अधिक मरीज प्रतिदिन प्राइवेट सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड जांच कराते हैं। एक मरीज को 400 से 600 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
----
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर व्यवस्था बदहाल
जिले में 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जिसमें बनकटी व नौतनवां में अल्ट्रासाउंड मशीनें छह साल से धूल फांक रही हैं। इन्हें संचालित करने के लिए रेडियोलाजिस्ट नहीं हैं। 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर न तो रेडियोलाजिस्ट हैं, न अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं। औसतन एक सीएचसी पर 100 से अधिक ओपीडी होती है। एक सीएचसी पर 30 से 40 मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में इन लोगों को निजी सेंटरों से 400 से 600 रुपये की दर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। जिले में प्रतिदिन करीब 600 मरीज सरकारी अस्पतालों से निजी सेंटरों पर जाकर अल्ट्रासाउंड कराते हैं।
------------
केस एक
चेहरी गांव के रहने वाले रघुवंश मणि ने बताया कि पेट में दर्द हो रहा था, तो डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दी। जिला अस्पताल में जांच की व्यवस्था नहीं होने के कारण निजी सेंटर से 600 रुपये देकर अल्ट्रासाउंड कराया है।
------
केस दो
हरखा गांव की ज्ञानती देवी ने बताया कि घुघली सीएचसी में अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था नहीं होने के कारण महराजगंज आना पड़ा। एक निजी सेंटर से 500 रुपये देकर जांच करानी पड़ी। आने जाने में भी पैसे खर्च करने पड़े।
-------
रेडियोलाजिस्ट की कमी है। इस संबंध में शासन से पत्राचार किया गया है। पीपीपी मोड पर व्यवस्था संचालित करने की कोशिश की जा रही है। जल्दी ही समस्या दूर कर ली जाएगी।
विज्ञापन

- डॉ. नीना वर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी
---------
एक सप्ताह में गोंडा से स्थानांतरित होकर आने वाले चिकित्सक आ जाएंगे। इसके बाद काफी हद तक समस्या दूर हो जाएगी। उपलब्ध संसाधनों में बेहतर ढंग से कार्य करने की कोशिश जारी है।
-डॉ. एके द्विवेदी, प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें