महराजगंज। नेपाल के सीमावर्ती जिलों में बन रही मस्जिदों और मदरसों में तुर्की मदद कर रहा है। इस काम में तुर्की का एक गैर-सरकारी संगठन फाउंडेशन फॉर ह्यूमन राइट्स एंड फ्रीडम्स एंड ह्यूमैनिटेरियन रिलीफ (आईएचएच) शामिल है। संगठन के चरमपंथी समूहों से संबंध होने की बात कही जाती है। इसे तुर्की सरकार और खुफिया एजेंसियों से समर्थन मिलने का आरोप है। इसे लेकर नेपाली सुरक्षा एजेंसिया सतर्क हो गई हैं।
सूत्रों मानें तो आईएचएच जैसे संगठन नेपाल के स्थानीय इस्लामी समूहों जैसे इस्लामी संघ नेपाल (आईएसएन) के साथ मिलकर अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी के लिए मस्जिदें, मदरसे, अनाथालय और इस्लामी केंद्र बना रहे हैं।
जिसका इस्तेमाल धर्मांतरण के लिए भी किया जा रहा है। इसकी खुफिया रिपोर्ट के बाद नेपाल सुरक्षा एजेंसियों ने जांच तेज कर दी है। रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है की नेपाली गरीब हिंदू परिवार को टारगेट कर नेपाली संस्कृति के साथ ही उन्हें दीनी शिक्षा दी जा रही है।
एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की अब नेपाल में पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के हितों के लिए एक जटिल चुनौती पेश कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल के सीमावर्ती जिलों में तुर्की और पाकिस्तान समर्थित धार्मिक केंद्रों और नेटवर्कों का विकास भारत के लिए गंभीर और जटिल चुनौती है। बताया जा रहा है कि पिछले दो साल में इन इलाकों में 500 करोड़ से ज्यादा की विदेशी फंडिंग हुई है।
नेपाल में तुर्की की कार्रवाई नई है लेकिन महत्वपूर्ण है। तुर्की के गैर-सरकारी संगठन आईएचएच ने नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। उसने इस्लामी संघ नेपाल (आईएसएन) जैसे स्थानीय समूहों के साथ गठजोड़ किया है। आईएसएन पर भी चरमपंथी विचारधारा से संबंध रखने के आरोप है। आईएचएच ने अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी के लिए मस्जिदों, मदरसों, अनाथालयों और इस्लामी केंद्रों के निर्माण को प्रायोजित किया है। सूत्रों की मानें तो नेपाल सीमा पर तुर्की समर्थित तत्वों का भारत के लिए जटिल मामला है। पाकिस्तान के खुले तौर पर विरोधी रुख के विपरीत तुर्की का रुख ज्यादा सूक्ष्म है। क्योंकि वह इस्लामी नेटवर्कों के लिए मौन समर्थन के साथ-साथ सॉफ्ट पावर को भी जोड़ रहा है।
प्रसार को फंंडिंग में आईएसआई की भी भूमिका : सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने भी अपनी जासूसी एजेंसी आईएसआई के माध्यम से भारत-नेपाल सीमा पर मस्जिदों और मदरसों के तेजी से प्रसार को फंंडिंग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यह काम विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे प्रांतों में किया जा रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्र में मस्जिदों और मदरसों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। यह संस्थाएं न केवल धार्मिक प्रतिष्ठान हैं, बल्कि इन पर भारत विरोधी भावनाएं भड़काने और सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय अपराधियों और चरमपंथी गुर्गों को पनाह देने का भी आरोप है।