दो घोंसले मिले, एक में तीन अंडे, ड्रोन कैमरे से रखी जा रही नजर, पेड़ पर दिख रहे हैं चार पक्षी
सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग की मधवलिया रेंज अंतर्गत ग्रामसभा ओबरी में इमली के पेड़ हैं हाड़ील पक्षी
निचलौल। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग की मधवलिया रेंज अंतर्गत ग्रामसभा ओबरी में दुर्लभ हाड़ील पक्षी के प्रजनन की उम्मीद में वन विभाग सतर्क हो गया है।वन विभाग ने पक्षी की निगरानी बढ़ा दी है। डब्ल्यूटीआई के सदस्य रविंद्र त्रिपाठी के अनुसार पेड़ पर चार हाड़ील पक्षी हैं।
ओबरी गांव निवासी गोविंद चौधरी के घर के पीछे स्थित पुराने इमली के पेड़ पर पक्षी के दो घोंसले मिले हैं। वन विभाग और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) की टीम ने ड्रोन कैमरे से निगरानी के दौरान एक घोंसले में तीन अंडे होने की पुष्टि की है। दूसरा घोंसला भी तैयार किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में हाड़ील पक्षी का कुनबा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। टीम ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी है। अधिकारियों के निर्देश पर निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी गई है।
डब्ल्यूटीआई के सदस्य अरशद हुसैन के अनुसार, निचलौल और मधवलिया रेंज के कई गांवों में पहले भी बड़ा हाड़ील पक्षी दिखाई देता रहा है। करीब एक वर्ष पहले मदनपुरा, परागपुर और बैदौली के सिवान में इसकी मौजूदगी दर्ज की गई थी। तभी से टीम इस दुर्लभ पक्षी पर नजर रख रही थी। पिछले महीने ओबरी गांव में एक विशालकाय इमली के पेड़ पर बड़े पक्षी के बैठे होने की सूचना मिली। पेड़ पर बैठे पक्षी का पैर पेड़ की डाली में फंसने की सूचना पर मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने उसकी पहचान हाड़ील पक्षी के रूप में की थी।
अंडों की सुरक्षा और निगरानी पर रहेगा जोर
वन क्षेत्राधिकारी मधवलिया अजीत कुमार भास्कर ने बताया कि वन विभाग के कर्मचारी समय-समय पर गांव पहुंचकर पक्षी की निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है ताकि पक्षी और उसके घोंसले को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। इसके पहले निचलौल रेंज इसकी निगरानी किया था। डब्ल्यूटीआई के सदस्य रविंद्र त्रिपाठी के अनुसार, पेड़ पर हाड़ील पक्षी के चार सदस्य दिखाई दे रहे हैं। पक्षी अपने घोंसले के आसपास दूसरे पक्षियों को भी बैठने नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले इमली के पेड़ पर बंदरों का झुंड दिखाई देता था लेकिन अब पक्षी के घोंसले बनाने के बाद वहां जीव-जंतुओं की आवाजाही कम हो गई है।
अंडों से बच्चे निकलने तक ये होंगी चुनौतियां
हाड़ील पक्षी के अंडों से बच्चे निकलने तक घोंसले की सुरक्षा महत्वपूर्ण होगी। इस दौरान तेज हवा, बारिश, घोंसले को नुकसान पहुंचने, अंडों पर दूसरे जीवों के हमले और मानवीय गतिविधियों से पक्षी के विचलित होने जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। ऐसे में वन विभाग की टीम घोंसले की स्थिति, पक्षियों की गतिविधियों और अंडों की सुरक्षा पर नजर रखेगी।
विशेषज्ञों से जानकारी लेने के बाद अरशद हुसैन ने बताया कि बड़े हाड़ील पक्षी के अंडों से बच्चे निकलने में सामान्यतः करीब 28 से 30 दिन लग सकते हैं। हालांकि, वास्तविक समय अंडे सेने की शुरुआत और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए बच्चों के निकलने की निश्चित तारीख बताना अभी संभव नहीं है।
दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी से बढ़ी उम्मीद
हाड़ील बड़े आकार का दुर्लभ पक्षी है। असम में इसे स्थानीय रूप से ''हरगिला'' भी कहा जाता है। गर्दन के नीचे थैलीनुमा संरचना, भारी चोंच और सिर पर बाल न होना इसकी प्रमुख पहचान है। यह नम भूमि, दलदली क्षेत्रों, आर्द्रभूमि और नदियों के आसपास रहना पसंद करता है। इसके भोजन में जलीय जीव-जंतुओं के साथ सांप, मेंढक और चूहे भी शामिल हैं। चूहों को भोजन बनाने के कारण इसे किसानों का मित्र भी माना जाता है। क्षेत्र में इसकी मौजूदगी पहले भी देखी गई थी, लेकिन यहां घोंसले और अंडे मिलने से प्रजनन की उम्मीद जगी है। वन विभाग और डब्ल्यूटीआई की टीम इसे दुर्लभ पक्षी के संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हुए सतर्क निगरानी कर रही है।