महराजगंज। परिषदीय स्कूलों के विलय से जुड़े नए आदेश के तहत 50 से कम संख्या वाले उन स्कूलों का विलय रद्द होगा जिन्हें एक किमी से अधिक की दूरी वाले स्कूलों में मर्ज किया गया है। विभाग ने एक बार फिर मर्ज स्कूलों का सर्वे कराने का फैसला लिया है।
बार-बार नए आदेश लागू होने से अभिभावकों में असंतोष है। उनका आरोप है कि परिषदीय स्कूलों को जैसे प्रयोग का जरिया समझ लिया गया। विभाग बच्चों की पढ़ाई चौपट करने पर तुला है। एक के बाद एक आदेश प्रभावी होने का बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ना तय है।
परिषदीय स्कूलों में नया शिक्षा सत्र 2025-26 अप्रैल से शुरू हुआ। 1 जुलाई को स्कूल खुले तो 50 से कम नामांकन वाले स्कूलों का विलय निकटतम परिषदीय स्कूलों में करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
यू-डायस पोर्टल के रिकॉर्ड के अनुसार जिले के 295 परिषदीय स्कूल इस दायरे में मिले तो सभी को नोटिस जारी किया गया।
शिक्षक संगठन, अभिभावक और स्कूल प्रबंधन समितियों के विरोध के बाद भी विभाग ने खंड शिक्षा अधिकारियों की सहायता से 165 स्कूलों का विलय पूरा कर लिया। अब नया आदेश है कि एक किमी से अधिक दूरी वाले स्कूलों का विलय निरस्त किया जाएगा।
पढ़ाई को लेकर अभिभावक चिंतित: अभिभावक मनोज पटेल, नरेंद्र कन्नौजिया, रामप्रसाद व जगराम सहित अन्य का कहना है कि विभाग नए-नए आदेश देकर बच्चों की पढ़ाई चौपट कर रही है। पूरा जुलाई महीना स्कूलों के विलय की प्रक्रिया में बीत गया। अब विलय रद्द होगा तो इसमें भी महीना बीतेगा।
आखिर यह गतिविधि सत्र प्रभावी होने के बीच ही क्यों की जा रही है। इन्हें ग्रीष्मकालीन अवकाश में क्यों नहीं पूरा कराया गया। बार-बार नए आदेश का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
इससे अगले साल और नामांकन घटेगा क्योंकि अभिभावक बच्चों को पढ़ने के लिए भेजते हैं, इसलिए नहीं कि विभाग उन्हें प्रयोग का माध्यम बनाए।