फरेंदा/बृजमनगंज। नौसागर के करमहां टोले के समीप ईंट भट्ठे पर जहां बच्चों की किलकारी और ईंटों की खनखनाहट गूंजती थी बुधवार को वहां सन्नाटा पसरा रहा। अगल-बगल के लोग भी शोक में डूबे रहे। परिजन तीनों मजदूरों के शव लेकर गांव लौट गए। जाते समय बोले साहब अब यहां नहीं आएंगे। हमारा पूरा परिवार ही उजड़ गया। अब बच्चों की परवरिश कैसे होगी।
बृजमनगंज क्षेत्र के नौसागर गांव में स्थित ईंट भट्ठे पर बुधवार की शाम ईंट निकालते समय दीवार ढहने से झारखंड प्रदेश के लोहरदंगा निवासी तीन मजदूर संतोष, पार्वती व सुशीला की मौत हो गई थी, जबकि दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। झारखंड के मजदूर वीरपन्न ने बताया कि अब यहां कभी नहीं काम पर आएंगे। फैक्ट्री में रहकर काम करके जीविका चला लेंगे, लेकिन भट्ठे पर काम नहीं करेंगे। घटना के बाद लगातार अधिकारियों का आना-जाना लगा है। एसडीएम नवीन कुमार, सीओ अनिरुद्ध कुमार के साथ नायब तहसीलदार सहित गठित जांच टीम के सभी विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंच कर जांच में जुटे हैं। एसडीएम नवीन कुमार ने बताया कि मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसकी प्रक्रिया चल रही है।
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ईंट भट्ठे का दफ्तर भी बंद रहा
हादसे के बाद ईंट भट्ठे का दफ्तर पर बृहस्पतिवार को ताला लटका रहा, लेकिन दिन भर अधिकारियों के आने के बाद दफ्तर के बाहर बैठे रहे। गांव के लोगों का भी आना जाना लगा रहा। सभी लोग हादसे को लेकर दुख जाहिर कर रहे थे।
मां पापा कब आएंगे
बृजमनगंज क्षेत्र के नौसागर में बुधवार की शाम दिल दहला देनी वाली घटना के बाद हर कोई स्तब्ध है। मजदूरों की दर्दनाक मौत से पूरा कुनबा टूट चुका है। परिजन अपनों के खोने के दर्द के आगे पेट की भूख नहीं दिख रही थी। घटना के बाद से हर कोई घटना को लेकर विधाता को कोस रहा था। दर्दनाक हादसे के बाद मजदूरों के घर चूल्हे तक नहीं जले। ह्दयविदारक घटना में मृतक संतोष की पत्नी शीला अपने तीन वर्षीय बेटे आर्यन के साथ गुमसुम बैठी थी। बच्चा बार-बार पूछ रहा था मां पापा कब आएंगे। बेटे को पीठ पर कपड़े से बांधे हुई बैठी रही। वह भूख की तड़प से सो गया था। मृतका के पति कृष्णा तीन बेटी व एक बेटे के साथ भट्ठे पर काम के लिए आए थे। बच्चे मां की मौत से टूट चुके थे उनको भूख नहीं लग रही थी। अगल-बगल के लोग कुछ खाने के लिए दे रहे तो भरे मन से कुछ खा लिए थे। 22 मजदूरों का कुनबा बिना कुछ खाए पीए 24 घंटे से पड़ा है। बच्चे भूख से बिलबिला रहे थे।
मेरी आंखों के सामने ही दफन हो गए तीन लोग
फरेंदा। अरे भागो भागो ईंट का दीवार ढह रही है। कहते हुए कुछ मजदूर चिल्ला रहे थे, तेज पछुआ हवा व उड़ती भट्ठे की धूल से सभी की आवाजें थम गईं। देखते ही देखते करीब पांच लोग ईंट के ढेर के नीचे दब गए किसी प्रकार से कुछ लोगों को बाहर खींच कर निकाला गया। तब तक तीन लोगों की सांसें थम चुकी थीं। थोड़ी देर और रूके होते तो करीब दस मजदूरों का जान चली जाती।
यह बात झारखंड से नौसागर मजदूरी के लिए पहुंचे वीरपन्न ने कहीं। उसने हादसे का जिक्र किया तो उसके चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। मजदूर करमी उमराव ने बताया कि सभी लोग ईंट के दीवार से ईंट निकाल कर बाहर ले जा रहे थे। कुछ मजदूर बाहर चले गए थे, थोड़ी देर पहले घटना होती और अधिक मजदूर की मौत हो गई होती। किसी प्रकार से जो मजदूर दिखे उनको बाहर निकाला गया। मजदूर कृष्णा ने बताया कि चार बच्चों के साथ पति पत्नी मजदूरी के लिए पहुंचे जहां पर भयावह घटना ने दुनिया उजाड़ दी। मजदूर रामरतन के अनुसार, भयावह मंजर के आगे सभी मजदूर विवश हो गए। उड़ती धूल से सबकी आंखे बंद हो जा रही थी, ईंट के नीचे दबे लोग चिल्ला रहे थे किसी प्रकार से बाहर निकाला गया था, उसके बाद भी तीन लोगों को नहीं बचाया जा सका।