महराजगंज। जनपद में जल्द भर्ती किए गए 231 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। आवेदन करने वाले जिन अभ्यर्थियों का चयन नहीं हुआ उन्होंने स्थानीय स्तर से लेकर सीएम जनता दरबार तक शिकायत की है। शासन स्तर से डीपीओ को किसी अन्य विभाग से जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश मिले हैं।
जनपद के विभिन्न ब्लाॅक में रिक्त 231 आंगनबाड़ी पदों की भर्ती के लिए गत वर्ष आवेदन मांगे गए थे। योग्यता इंटरमीडिएट निर्धारित थी, लेकिन आवेदन करने वालों में स्नातक, परास्नातक कौन कहे बीएड व बीटीसी की डिग्री वाली अभ्यर्थियों ने भी आवेदन किया। हालांकि विभाग ने सिर्फ अपने मानक इंटरमीडिएट के अनुसार चयन किया। भर्ती में शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जगह अन्य प्रमाणपत्रों ने अहम भूमिका निभाई।
आय, जाति, निवास, दिव्यांग, तलाकशुदा प्रमाणपत्रों को वेटेज देकर निर्धारण किया गया। 231 पदों के सापेक्ष 10 हजार से अधिक आवेदन विभाग को मिले थे, लेकिन विभाग ने अपात्रों को छांटने के बाद कुल 9650 आवेदनों को प्रक्रिया में शामिल किया। सभी प्रमाणपत्रों की तस्दीक सीडीपीओ की मदद से सत्यापन कराते हुए विभाग ने नये वित्तीय सत्र से पहले चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया।
जिन अभ्यर्थियों का चयन नहीं हुआ उन्होंने पहले स्थानीय अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन कार्रवाई न होने से मामला मुख्यमंत्री जनता दरबार तक पहुंचा दिया। इसका संज्ञान लेते हुए विभाग ने किसी अन्य विभाग से शैक्षिक प्रमाणपत्रों के साथ अन्य सभी प्रमाणपत्रों की जांच कराकर रिपोर्ट तलब की है।
विवाहित होकर लगाया तलाकशुदा का प्रमाणपत्र
जनपद के बड़वार, डिंगुरी व राममंदिर की रेणू सिंह, नूरजहां, चंद्रकला ने जनता दरबार की शिकायत में दिव्यांग, तलाकशुदा, आय प्रमाणपत्रों के फर्जी होने का आरोप लगाया है। कहा गया कि जिनका चयन किया गया वह इसके हकदार नहीं थे। एक ट्रांसपोर्ट की मालकिन ने खुद को गरीब दिखाने के लिए फर्जी आय प्रमाणपत्र लगाने तो कुछ चयनित कार्यकर्ताओं पर यह आरोप है कि उनके पहले शौहर (पति) का इंतकाल (मृत्यु) हुई, लेकिन उन्होंने दूसरे से निकाह कर रखा है, ऐसे में तलाकशुदा की वरीयता कैसे दी गई।
शिकायत का अधिकार सभी को
आंगनबाड़ी, सहायिका व मिनी आंगनबाड़ी संघ की जिलाध्यक्ष कुसुम कांति त्रिपाठी, निवासी असुरैना ने कहा कि शिकायत का अधिकार सभी को है। विभाग ने अगर सही अभ्यर्थियों की नियुक्ति की है तो वह जांच किसी से भी एक बार नहीं कई बार करा सकता है।
प्रमाणपत्रों की जांच के बाद ही नियुक्ति की गई। जांच के लिए शासन से निर्देश मिला है। एक जुलाई से स्वास्थ्य या शिक्षा विभाग की मदद से जांच कराकर रिपोर्ट 10 जुलाई तक भेज दी जाएगी।
-दुर्गेश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी