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Maharajganj News: सिसवा सीएचसी में डॉक्टर के पद आठ, तैनात हैं चार

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अस्पताल में एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं
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बाहर से जांच कराने के लिए मजबूर हैं मरीज
सिसवा बाजार। करोड़ों की लागत से निर्मित नगर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सकों के अभाव से जूझ रहा है। यहां मामूली रोगों का इलाज तो हो जा रहा है, मगर गंभीर इलाज के लिए मरीजों को भटकना पड़ रहा है। मरीज या तो महराजगंज जा रहे हैं या गोरखपुर जाकर इलाज कराने के लिए मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आठ विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद हैं। इसमें महिला चिकित्सक, बाल रोग, दंत चिकित्सक सहित अन्य रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति होनी चाहिए। मगर यहां पर चार चिकित्सकों की ही नियुक्ति होती है। वर्तमान समय में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. ईश्वर चंद विद्या सागर, डॉ. पवन सिंह, प्रशिक्षु चिकित्सक डॉ. राजकुमार व संक्रामक रोग के डॉ. राधेश्याम अग्रहरी की नियुक्ति है, जबकि यहां 18 नियमित व 24 संविदा कर्मचारी तैनात हैं।
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अस्पताल में अल्ट्रासाउंड और आधुनिक एक्स-रे मशीन नहीं है। इसके अलावा यहां हेल्थ एटीएम भी स्थापित नहीं किया गया है। डेंटल हाईजिनिस्ट तो हैं पर दंत रोग चिकित्सक नहीं हैं। इसके अलावा चेस्ट स्पेशलिस्ट, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ और ईएनटी के भी डॉक्टर नहीं हैं।
अस्पताल में गंभीर रोगियों के लिए इमरजेंसी सुविधा भी नहीं है। इस सीएचसी में रोजाना 300 से अधिक मरीजों का इलाज किया जाता है। महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं होने के बावजूद एक महीने में स्टॉफ नर्स के जरिए 100 से अधिक प्रसव कराए जाते हैं। गंभीर रोगियों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
प्रभारी डॉ. ईश्वरचंद विद्यासागर ने बताया कि अस्पताल में दवाएं भरपूर हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति व अन्य सुविधाओं के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। मगर जिले में चिकित्सकों की कमी की वजह से नियुक्ति नहीं हो पा रही है।
गंभीर रोगों का इलाज नहीं
सांस फूलने की बीमारी है। अस्पताल में साधारण मरीजों के लिए तो सुविधाएं हैं, मगर गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
-गौरी किसुन, भागीरथी, सिसवा बाजार
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महिला और बाल चिकित्सक नहीं होने से काफी परेशानी होती है। ज्यादातर रोगियों को जिला अस्पताल या प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। रक्त की जांच तो हो जाती है, मगर अल्ट्रासाउंड और कमर का एक्सरे बाहर से कराना पड़ता है।
-गंगोत्री देवी, कोठीभार
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1952 से संचालित राजकीय महिला चिकित्सालय को दिया गया बंद
सिसवा कस्बे में महिलाओं के रोगों के निदान के लिए 1952 में राजकीय महिला चिकित्सालय की स्थापना की गई थी। विभागीय उदासीनता के कारण वह अस्पताल भी चार वर्ष पहले बंद कर दिया गया। सभासद प्रतिनिधि राजन विश्वकर्मा का कहना है कि जिले में महिलाओं के इलाज के लिए सिसवा में राजकीय महिला अस्पताल 74 वर्ष पहले स्थापित किया गया था। विभागीय उदासीनता के कारण इस अस्पताल को विगत चार वर्ष पूर्व बंद कर दिया गया। इससे क्षेत्र का काफी नुकसान नुकसान है। इस मुद्दे को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया गया, पर जिम्मेदार विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौन साधे रहे।
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इन पदों पर है आवश्यकता
सिसवा सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. ईश्वरचंद विद्यासागर ने बताया कि आठ डाक्टरों सहित अन्य कर्मचारियों और मशीनों की आवश्यकता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, अस्थि रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, ईएनटी चिकित्सक, दो एमबीबीएस डॉक्टर, रेडियोलोजिस्ट की जरूरत है। इसके अलावा दो वार्ड बॉय, एक स्वीपर, एक चौकीदार, अल्ट्रासॉउंड सेटअप, डिजिटल एक्स रे मशीन की आवश्यकता है।
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