लक्ष्मीपुर। बनर्सिहा कला में गौतम बुद्ध के ननिहाल देवदह के प्राचीन टीले पर बौद्ध सम्मेलन के दूसरे दिन बुधवार को भिक्षुओं ने देवदह प्राचीन बौद्ध स्तूप की परिक्रमा कर पूजा वंदना की। इस दौरान देश दुनिया की सलामती के लिए प्रार्थना भी की गई। बतौर मुख्यातिथि जिला पंचायत सदस्य सुरेंद्र चंद्र सहानी ने कहा कि दुनिया को अब युद्ध की नहीं केवल बुद्ध की जरूरत है। कपिलवस्तु के भंते अमित प्रिय ने बौद्ध धर्म को ध्यान, ज्ञान व दया का मार्ग बताया। बौद्ध भिक्षुओं के उद्घोष से बौद्ध टीले बुद्धम शरणम् गच्छामि से गूंज उठे। बौद्ध सम्मेलन में बौद्ध भिक्षुओं और धर्मावलंबियों ने सबसे पहले बौद्ध स्तूप की परिक्रमा और तथागत गौतम बुद्ध की वंदना की। बतौर मुख्यातिथि सुरेश चंद्र सहानी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बौद्ध धर्म ध्यान, ज्ञान व दया पर आधारित है। इसमें अहिंसा और परोपकार को विशेष महत्व दिया गया है। बौद्ध धर्म प्राचीन धर्मों में से एक है जिसने पूरे विश्व को शांति का संदेश दिया है। भंते अमित प्रिय ने कहा कि गौतम बुद्ध का पंचशील सिद्धांत अपना कर हम जीवन को सुखमय बना सकते हैं। गौतम बुद्ध का ननिहाल देवदह का विकास अत्यंत आवश्यक है। देवदह के विकास से क्षेत्र ही नहीं, सम्पूर्ण प्रेदश का विकास होगा। कार्यक्रम का संचालन देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने किया। इस अवसर पर भंते अमित प्रिय, जितेंद्र राव, महेंद्र जायसवाल, लक्ष्मीचन्द्र पटेल, रोहित गौतम, सन्तराम, अखिलेश कुमार, राममिलन, ज्वाला, अर्चना कोरी, आशुतोष कोरी, बेचू कन्नौजिया व अन्य उपस्थित रहे।