मौत के कारणों को जानने की आस लगाए बैठे मृतकों के परिजन भी हैं परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में बीते छह माह में हुई मौतों के मामले में विसरा रिपोर्ट नहीं आई है। इससे कातिलों के राज फाइलों में ही दफन होकर रह गए हैं। पिछले छह महीने में ऐसी सात मौतें हुई, जिनकी गुत्थी अब तक नहीं सुलझ पाई। अभी भी पुलिस को रिपोर्ट आने का इंतजार है। उधर, मौत के कारणों को जानने की आस लगाए बैठे मृतकों के परिजन भी परेशान हैं। जिले में संदिग्ध मौतों की गुत्थी सुलझाने में पुलिस को पसीना बहाना पड़ रहा है। विसरा रिपोर्ट समय से नहीं आती है। लंबे समय से रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। जिले में विभिन्न थानों से भेजे जाने वाली विसरा की रिपोर्ट कब आएगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
जब भी पोस्टमार्टम के बाद भी मौत की वजह पता नहीं चलती तो विसरा की जांच की जाती है। अगर गाड़ी से कुचल कर किसी की मौत हो जाए या किसी की गोली मारकर हत्या कर दी जाए तो शव का पोस्टमॉर्टम होता है। ऐसे मामले में आमतौर पर विसरा जांच की जरूरत नहीं होती। पर शव देखने के बाद अगर मौत की कुछ खास वजहों की आशंका होने पर विसरा की जांच कराई जाती है। खासकर मौत की वजह जहर होने की आशंका होने पर ऐसा किया जाता है। आठ अप्रैल को निचलौल थाना क्षेत्र के निचलौल झुलनीपुर नहर में करमहिया गांव के सामने धमउर निवासी युवक धर्मेंद्र (22) का हाथ बंधा हुआ शव मिला था। जिसके पोस्टमार्टम में स्पष्ट रिपोर्ट न आने के कारण विसरा भेजा गया, लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। 22 अप्रैल को निचलौल थाना क्षेत्र के परागपुर गांव में दो पक्षों में मारपीट के दौरान शिक्षामित्र नंदनी (45) की मौत हो गई थी। इनका भी विसरा जांच के लिए भेज दिया गया। अभी भी इस बिसरा रिपोर्ट का इंतजार है। 24 मार्च को निचलौल थाना क्षेत्र के झुलनीपुर नहर मार्ग स्थित सेमरा पुल के पास कुछ लोग चिता सजाकर चौक थाना क्षेत्र के पिपरा सोनाड़ी गांव की रहने वाली गीता (45) का शव छोड़ भाग गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ न आने पर विसरा जांच के लिए भेज दिया गया। जिस रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है। तीन मार्च को निचलौल थाना क्षेत्र के भारत नेपाल बॉर्डर से सटे अमडा उर्फ झुलनीपुर गांव में एक महिला सुभावती ने अपने ही पति पर 6 माह की मासूम बेटी सनीता को जमीन पर पटक और गला घोंटकर हत्या करने का आरोप लगाया था। उस मामले में भी विसरा रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है।
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सीआरपीसी की धारा-293 के तहत एक्सपर्ट व्यू एडमिशिबल एविडेंस होता है, यानी विसरा रिपोर्ट एक्सपर्ट व्यू होती है और यह मान्य साक्ष्य है। बचाव पक्ष चाहे तो विसरा रिपोर्ट तैयार करने वाले एक्सपर्ट को कोर्ट में पेश होने के लिए अर्जी दे सकता है और कोर्ट की ओर से बुलाने के बाद उनके साथ जिरह कर सकता है।
- संतोष श्रीवास्तव, अधिवक्ता, दीवानी कचहरी
लैब की कमी और बड़ी संख्या में सैंपल होने के कारण रिपोर्ट आने में ज्यादा वक्त लग जाता है। विसरा रिपोर्ट आने के बाद मौत का कारण स्पष्ट हो जाता है। विसरा प्रिजर्व करने के दौरान डेड बॉडी से लीवर, स्प्लीन और किडनी का पार्ट रखा जाता है। साथ ही शरीर में मौजूद फ्लूड आदि को प्रिजर्व किया जाता है। रिपोर्ट के लिए लैब में समय समय पर पत्र भेजा जाता है।
अनिरुद्ध कुमार, क्षेत्राधिकारी, निचलौल