न्यायालय परिसर में नए कानुन को लेकर चर्चा करती महिला अधिवक्ता।
महराजगंज। नए कानून का राज अब शुरू हो गया है। नए धाराओं में केस दर्ज होने के साथ ही इसे लेकर गहन अध्ययन भी हो रहा है। चाहे कचहरी हो या थाना, हर जगह इसकी चर्चा हो रही है। डिजिटल साक्ष्य पीड़ितों के लिए मददगार होगा। माफिया पर शिकंजा कसेगा। पुलिस के लिए भी फोटो, वीडियो और कॉल रिकॉर्डिंग की मदद से सजा दिलाने में आसानी होगी।
जानकारी के अनुसार, बृहस्पतिवार को दीवानी कचहरी परिसर में महिला अधिवक्ता चेंबर में बैठकर आपस में चर्चा कर रहीं थीं। डिजिटल साक्ष्य से लेकर नई धाराओं पर मंथन किया जा रहा था। अधिवक्ताओं ने कहा कि आपराधिक घटनाओं में नए कानून के हिसाब से मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। नए कानून में खास बात ये है कि संगीन अपराधों में सत्र परीक्षण के दौरान धमकी व लालच वश समझौता करने के बाद दोबारा पीड़ित व गवाहों का मुकरना आसान नहीं होगा।
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) होगी। आईपीसी में 511 धाराएं थीं, लेकिन भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं हैं। धाराओं का क्रम बदला गया है। सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता कहलाएगी। सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं। नए कानून में अब 531 धाराएं होंगी। भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के नाम से जाना जाएगा। पुराने अधिनियम में 167 प्रावधान थे। नए में 170 प्रावधान हो गए हैं।
इनमें डिजिटल साक्ष्यों का महत्व बढ़ाया गया है। नए कानून में पुलिस के लिए विवेचना में घटनास्थल पर पहुंचने से लेकर हर कदम पर वीडियो रिकॉर्डिंग व वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित करने की बाध्यता है। वीडियो रिकार्डिंग अदालत में ट्राॅयल के दौरान मजबूत साक्ष्य होंगे। संवाद
पहले दर्ज मुकदमों का ट्राॅयल पुराने कानून से ही होगा
नए कानून के अनुसार जो मुकदमे दर्ज होंगे, उनका ट्राॅयल नए कानून से होगा। वहीं पुराने कानून के तहत 30 जून की रात 12 बजे से पहले दर्ज मुकदमों का ट्राॅयल पुराने कानून से ही होगा। दीवानी न्यायालय में पहले से दाखिल मुकदमे पुराने कानून से ही चलाए जाएंगे। नए कानून में सबसे अधिक सुविधा गवाह और वादी को दी गई है। अगर गवाह को सूचना नहीं मिल पा रही है तो वह व्हाट्सएप पर मिलने वाले समन व वारंट को भी प्राप्त होना समझा जाएगा।