महराजगंज। मोटे अनाज की महत्ता जिसे समझ में आती है वही मोटा अनाज पिसवाता है। सेहत के लिए फायदेमंद मोटे अनाज में सभी जरूरी पोषक तत्व रहते हैं। आटे को पौष्टिक बनाने के लिए उसमें श्री अन्न (जौ, मडुआ, बाजरा, मक्का आदि) मिलवाकर पिसवा रहे हैं। पैकेट के आटे का प्रयोग करने वाले ही नहीं समाज में जागरूक लोग भी हैं। जागरूक लोग आटा चक्की तक गेहूं ले जाकर मोटा अनाज पिसवा रहे हैं। डॉक्टर फाइबर वाले आटा के लिए मोटे अनाज को गेहूं के साथ पिसकर खाने की सलाह दे रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, बाजार में बिक रहे ब्रांडेड आटा स्वाद और देखने में भले ठीक हो, लेकिन हकीकत यही है कि उसमें गुणवत्ता की अनदेखी ही होती है। शहर में आटा चक्कियों की संख्या बहुत कम है, लेकिन वहां भीड़ इस बात की गवाही दे रही है कि लोग सेहत के प्रति धीरे-धीरे जागरूक हो रहे हैं। इस भीड़ में आम और खास सभी शामिल हैं। आटा चक्की के पास लग्जरी गाड़ियां भी रूक रही हैं तो साइकिल और बाइक वाले भी पहुंच रहे हैं। इन गाड़ियों से उतरने वाले हाथों में कई प्रकार के अनाजों की छोटी-छोटी गठरी होती है।
शहर में कोतवाली के पास गेहूं के साथ मोटे अनाज का आटा बनाने वाले रूपेश श्रीवास्तव की चक्की खास हो गई है। धीरे-धीरे प्रचार हुआ तो इनके वहां आने वालों की संख्या बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि कुछ डॉक्टर भी मरीजों को मोटे अनाज की रोटी खाने की सलाह दे रहे हैं। दवा से बीमारी खत्म करने के साथ डॉक्टर खान-पान से सेहत सुधारने की सलाह दे रहे हैं। पैकेट का आटा खाने के बाद जो लोग पेट के रोगी हो गए हैं, उन्हें भी अब पुराने जमाने के खान-पान की ओर लौटना पड़ रहा है।
मोटे अनाज वाला आटा भी सामान्य से दो तीन गुना अधिक महंगा
आटा चक्की वालों का कहना है कि अभी महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ से सांबा, बंगलूरू से मडुआ आ रहा है। इस वजह से इन अनाजों की कीमत अधिक है। मांग के अनुसार आटा की उपलब्धता नहीं होने पर यह मोटे अनाज वाला आटा भी सामान्य से दो तीन गुना अधिक महंगा है। बांसपार रोड पर आटा चक्की चलाने वाले रमेश कुमार ने बताया कि गेहूं की बड़ी गठरी कम आ रही है, लेकिन मोटा अनाज पिसाने के लिए लोग आ रहे हैं। चना, जौ, बाजरा, मक्का, मडुआ, ज्वार, सांवा, टांगुन मिश्रित आटा 75 रुपये प्रति किलो से लगायत 90 रुपये प्रति किलो तक के भाव में बिक रहा है।