विभिन्न न्यायालयों से निपटे 570088 मामले
न्यायमूर्ति ने विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका की सराहना
महराजगंज। सुलह-समझौते के आधार पर अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण ही लोक अदालत आयोजन का उद्देश्य है। यह आज इसलिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि अत्यधिक मामले जब लंबित रहते हैं तो न्यायपालिका पर इसका बोझ बढ़ता है। इसलिए सभी न्यायालय आपसी सामंजस्य से नियमित अंतराल पर होने वाले लोक अदालत मामलों का निस्तारण करें।
यह बातें दीवानी न्यायालय महराजगंज में लोक अदालत का शुभारंभ करते हुए न्यायमूर्ति विवेक वर्मा ने व्यक्त कीं। उन्होंने सफल आयोजन के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रयास की सराहना की। आयोजन में विभिन्न अदालतों से कुल 57,088 वाद निस्तारित किए गए। जनपद न्यायाधीश ने कुल 39 वाद निपटाए गए। पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण से कुल 102 वादों का निस्तारण किया गया। 6.40 करोड़ रुपये का क्षतिपूर्ति दिलाई गई। प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय द्वारा कुल-59 वैवाहिक वादों का निस्तारण किया गया। अध्यक्ष स्थाई लोक अदालत द्वारा कुल पांच वादों का निस्तारण कर 4.27 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाई गई।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम ने कुल-185 वादों का निस्तारण किया। जबकि विशेष न्यायाधीश (एससी एसटी से कुल-35, विशेष न्यायाधीश अनन्य न्यायालय (पॉक्सो अधि०) ने कुल-35, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुल-507 वादों का निस्तारण किया गया। अपर सिविल जज, प्रवर खंड(त्वरित न्यायालय) महराजगंज में कुल 163 वादों का निस्तारण किया गया और 28,850 रुपये अर्थदंड के रूप मे वसूल किया गया।
इस अवसर पर एसपी सोमेन्द्र, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय रमेश दूबे, पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण अखिलेश कुमार पाठक, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम संजय मिश्रा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी) सियाराम चौरसिया, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) फूलचन्द्र कुशवाहा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुकेश यादव व अन्य मौजूद रहे।